रोशनी के त्योहार पर एक मासूम बच्चे समेत चार लोगों की दुनिया में अंधेरा छा गया। पटाखे छुड़ाते वक्त हुई लापरवाही से इनकी आंखों में बारूद घुसा और इन्हें दिखना बंद हो गया। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
70 अन्य लोगों की आंखों में भी दिवाली के जश्न के दौरान बारूद घुस गया। इनमें से 20 को आंखों में गंभीर चोट आई हैं। कटघर थाना क्षेत्र में इंदिरा कालोनी निवासी टैक्सी ड्राइवर सुधीर कुमार का बेटा गौरव (11) रविवार को रात करीब साढ़े नौ बजे घर के बाहर पटाखे छुड़ा रहा था।
पटाखे में आग लगाते वक्त वह अचानक फट गया। बारूद गौरव की बाईं आंख में गया और उसकी रोशनी चली गई। रविवार की रात करीब पौने ग्यारह बजे छब्बीस वर्षीय मनोज को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। मनोज की आंख में गंभीर चोट आई थी। उन्हें दिखना बंद हो चुका था। पटाखा छुड़ाते वक्त उनकी आंख में बारूद घुसा था।
चिकित्सकों ने तुरंत उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। रात में पौने बजे आंखों में जख्म लेकर 31 वर्षीय पूनम जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंची। पूनम की आंखों में भी गहरे जख्म थे और उन्हें दिखना एकदम बंद हो चुका था। इमरजेंसी में मौजूद नेेत्र रोग विशेषज्ञ डा. अब्दुल कादिर अंसारी के मुताबिक पटाखा जलाते समय दोनों की आंखों में बारूद घुस गया था।
आंखों में गंभीर जख्म होने से दोनों की रोशनी चली गई थी। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों का हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। सोमवार की शाम छजलैट के चंगेरी गांव निवासी कार्तिक (6) पुुत्र बबलू को गंभीर हालत में लेकर परिजन अपोलो नेत्र चिकित्सालय पहुंचे।
परिजनों के मुताबिक आतिशबाजी देखते समय कार्तिक की आंख में बारूद घुसा और उसकी आंखों की रोशनी चली गई। डा. पल्लव अग्रवाल ने बताया कि बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई है। उसकी आंख में खून आ गया।
जिला नेत्र चिकित्सालय के डा. गिरजेश केन ने बताया कि पटाखे छुड़ाते वक्त आंखों में बारूद जाने से जख्मी तीन मरीजों को अस्पताल से रेफर किया गया। हिमगिरी निवासी श्रीनिवास के बेटे उत्कर्ष यादव (13) की आंखों में बारूद घुस गया।
इनमें से एक की आंखों की रोशनी जा चुकी है। इसके अलावा 70 से अधिक लोग आंखों में बारूद जाने की शिकायत लेकर जिला अस्पताल और शहर के बाकी आई हास्पिटल में पहुंचे। 20 की आंखों की हालत सीरियस है।