प्रेम विवाह से नाराज युवती की हत्या कर सुबूत मिटाने के आरोप में अदालत ने युवती के पिता और उसके पांच भाइयों को उम्रकैद व 12-12 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। शहजादनगर थाना क्षेत्र के चमरपुरा गांव निवासी शाकिर अली ने 18 जुलाई 2012 की रात में भोट थाने में तहरीर देकर कहा था कि 14 जुलाई को वह अपनी बहन राबिया को रुद्रपुर से बाइक से लेकर घर आ रहा था।
कोयला गांव के पास बेकाबू डंपर ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह और उसकी बहन दोनों घायल हो गए थे। घायल राबिया की बरेली में इलाज के दौरान 26 जुलाई की रात में मौत हो गई थी। इस तहरीर पर हादसे की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
पुलिस को जानकारी दिए बिना शव को दफनाए जाने से उठे संदेह के क्रम में शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम करवाया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राबिया के शव पर चोट के कई निशान मिले थे। इसके बाद पुलिस ने हादसे के मुकदमे को गैर इरादतन हत्या में तरमीम कर दिया था।
विवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि राबिया ने इस्लाम नामक युवक के साथ शादी कर ली थी, जिससे उसके परिवार के लोग नाराज थे। इस्लाम ने एक अगस्त 2012 को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि उसने राबिया के साथ 29 मई 2012 को कोर्ट मैरिज की थी।
इस शादी से नाराज राबिया के परिजन उस पर तलाक लेने के लिए दबाव बना रहे थे। इस आधार पर पुलिस ने इस मुकदमे में आईपीसी की धारा 147, 149, 302 और 201 बढ़ा दी थी। पुलिस ने राबिया के पिता और भाइयों के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी।
इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने कई गवाहों को पेश किया और आरोपियों को कड़ी सजा की पैरवी की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को झूठा फंसाने की बात कही।
एडीजीसी प्रमोद सागर ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे एफटीसी-2 रश्मि रानी ने राबिया के पिता शराफत हुसैन, भाई जाकिर, हातिम, साबिर, सद्दाम और शाकिर को उम्रकैद व 12-12 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
राबिया के पति ने लड़ी लंबी लड़ाई
कोर्ट मैरिज करने के बाद रबिया को उसके भाई वापस घर ले आए थे और उस पर इस्लाम को तलाक देने के लिए दबाव बना रहे थे। इस्लाम ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर राबिया की जान खतरे में बताई थी। इस्लाम ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि राबिया की मौत सड़क दुर्घटना में नहीं हुई थी, बल्कि उसे डंपर के आगे डाल दिया गया था और घायल होने पर इलाज भी नहीं कराया गया था। कब्र से निकालकर राबिया के शव का पोस्टमार्टम कराने पर शरीर पर चोटों के निशान मिले थे। तब ही पुलिस ने मुकदमे में 302 समेत कई गंभीर धाराएं बढ़ाकर चार्जशीट दाखिल की थी।
खुद अपनी कहानी में फंस गए थे राबिया के भाई
राबिया की मौत को हादसा बताकर पुलिस को सूचना देने वाले उसके भाई खुद अपनी ही कहानी में फंस गए थे। पुलिस की विवेचना में उनकी कहानी से पर्दा उठ गया था। राबिया के भाई शाकिर अली ने हादसे में उसकी मौत की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन जांच में झूठ से पर्दा उठता गया और सच ऑनर किलिंग के रूप में सामने आया।