अधिवक्ता के भाई की हत्या के मामले में अदालत ने मुलजिम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
संभल जनपद के कोतवाली क्षेत्र के कोट पूर्वी में रहने वाले अधिवक्ता सलीम खां पुत्र मोइन खां ने संभल कोतवाली में 24 जून 2014 में एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि उनके भाई नसीम खां 24 जून 2014 की रात करीब ग्यारह बजे अपने घर लौट रहे थे।
उस वक्त मनोकामना मंदिर के पास मोटरसाइकिल सवार दो युवको ने उन्हें गोली मार दी थी। घायल अवस्था में नसीम को अस्पताल ले गए थे। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृतक घोषित कर दिया। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की। जिसमें जाहिद उर्फ होंडा का नाम प्रकाश में आया। जिसे गिरफ्तार कर पूछताछ की तो घटना के सभी तथ्य सामने आ गए। जिसमें पता चला कि जाहिद उर्फ होंडा अपनी विधवा फुफेरी बहन से शादी करना चाहता था। लेकिन विधवा बहन को नसीम खां आर्थिक रूप से मदद करता था। इसी कारण से जाहिद उर्फ होंडा पुत्र जाहिद निवासी कोट पूर्वी संभल नसीम से रंजिश रखने लगा और नसीम को अपने रास्ते से हटाने के लिए 24 जून की रात उसकी हत्या कर दी थी।
इस मामले की सुनवाई मुरादाबाद में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 11 मोहित शर्मा की अदालत में की गई। सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मधु रानी चौहान और समर्थ शुक्ला ने पक्ष रखा और दलीलें दीं। इस मामले में घटना के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने अदालत में पेश होकर जाहिद उर्फ होंडा के खिलाफ अपने बयान दर्ज कराए। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्य के आधार पर अदालत ने जाहिद उर्फ होंडा को हत्या का दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और साथ ही उस पर दो लाख का जुर्माना भी लगाया गया है।