मुरादाबाद। सिविल लाइंस के साढ़े पांच साल पुराने बहुचर्चित सुमित सिंह गोलीकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ग्यारह) सत्यप्रकाश द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने मुलजिम वरुण ठाकुर और रचित पाल को जानलेवा हमले (307) और 120 बी (साजिश रचने) का दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि दोनों दोषियों पर दो- दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सुमित ने न्याय की ये जंग व्हीलचेयर पर बैठकर जीती है। गोली सुमित की रीढ़ में फंस गई थी। जिससे उसका शरीर खराब हो गया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता मधु रानी चौहान ने बताया कि आठ अप्रैल 2014 को सिविल लाइंस थाने में चंद्र नगर निवासी गुरदीप सिंह ने वरुण ठाकुर निवासी बैंक कालोनी थाना मझोला और रचित पाल निवासी सम्राट अशोक नगर थाना मझोला के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया कि शाम साढ़े पांच बजे मेरा बेटा सुमित सिंह सन्धू और भतीजा करन दीप सिंह घर से गुरुद्वारा जा रहे थे। राम चंद्र नगर में रामचंद्र इंटर कालेज के पास आरोपी वरुण और रचित ने घेर लिया और सुमित को गोली मार दी थी। पुलिस ने आरोपी वरुण ठाकुर, रचित पाल और हरथला निवासी फरीद के खिलाफ जानलेवा हमला, साजिश रचना, जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इस केस की सुनाई एडीजे ग्यारह सत्यप्रकाश द्विवेदी की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी मधु रानी चौहान ने पक्ष रखा और मुलजिमों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दी। जिसमें कहा गया कि मुलजिमों ने सुमित को गोली मारी थी। गोली रीढ़ की हड्डी में फंस गई थी। जिससे उसके दोनों पैर दिव्यांग हो गए। जिससे उसका जीवन बरबाद हो गया है। इससे से तो अच्छा होता उसकी मृत्यु हो जाती। बेटे के व्हीलचेयर पर बैठने की वजह से सदमे में पिता गुरदीप सिंह की भी मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने दोनाें पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम वरुण ठाकुर और रचित पाल को जानलेवा हमले(307) और 120 बी (साजिश रचने) का दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दोनों दोषियों पर दो- दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड की धनराशि पीड़ित को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। तीसरे मुलजिम फरीद को अदालत ने बरी कर दिया है।
एक गोली ने तोड़ा दरोगा बनने का सपना, छीना पिता का साया
मुरादाबाद। व्हीलचेयर पर बैठकर न्याय की जंग लड़ने वाला सुमित सिंह सन्धू वर्दी पहनकर देश सेवा करना चाहता था, लेकिन एक गोली ने उसका सपना छीन लिया। सोमवार को फैसला आने के बाद उसने अपना दर्द बयां किया। सुमित ने कहा कि मेरा और मेरे परिवार का सपना था कि मैं पुलिस अफसर बनकर देश की सेवा करू। इसके लिए मैं तैयारी भी कर रहा था। जिस वक्त मुझे गोली मारी गई थी। उसके कुछ माह बाद ही सब इंस्पेक्टर की लिखित परीक्षा थी। जिसकी मैं तैयारी कर रहा था। लेकिन उस गोलीकांड ने मेरे सपनों को चकनाचूर कर दिया। अब मैं व्हीलचेयर पर हूं। शायद कभी उठ भी न पाऊ। मैं हर तारीख पर व्हीलचेयर पर ही बैठकर अदालत तक पहुंचा हूं। मेरे परिवार और दोस्तों ने मेरा साथ दिया। मैंने तो हमें दूसरों के बारे में अच्छा सोचा। देश सेवा का सपना लेकर आगे बढ़ रहा था। आज इस हालत में हूं कि उठकर एक गिलास पानी भी खुद नहीं पी सकता। मेरी मां और भाई मेरी सेवा कर रहे हैं।
सदमे में पिता की हो चुकी है मौत
मुरादाबाद। सुमित के पिता गुरदीप सिंह ट्रांसपोर्टर थे। बेटे को बेड और व्हील चेयर पर बैठा देख वह पूरी तरह टूट गए थे। बेटा दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो जाए। इसके लिए उन्होंने काफी इलाज कराया। लेकिन जब डाक्टरों ने जवाब दे दिया तो वह बर्दाश्त नहीं कराए। बेटे को इस हालत में देखकर वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए। घटना के डेढ़ साल बाद उनकी मृत्यु हो गई।
मेरे बेटे को इस हालत में पहुंचाने वाले जिंदगी भर सलाखों में तड़पेंगे
मुरादाबाद। सुमित के परिवार में मां रंजीत कौर और एक बड़ा भाई है। मां बेटे ही सुमित की देखभाल करते हैं। सुमित की मां ने कहा कि उन्हें न्याय पालिका पर पूरा विश्वास था कि मुलजिमों को सजा होगी। मेरे बेटे को इस हालत में पहुंचाने वाले ताउम्र सलाखों में तड़पेंगे।