सिर्फ चार दवाओं पर चल रही मानसिक रोग की ओपीडी
जिला अस्पताल में मानसिक रोग विभाग में रोजाना औसतन 80 मरीज आते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित मन कक्ष में भी सप्ताह के तीन दिन मरीजों की संख्या 80-90 रहती है। इसके बावजूद मानसिक रोग की ओपीडी सिर्फ चार दवाओं पर चल रही है।
इनमें वलप्रोएट, एस्सिटालोप्राम, क्लोनाजेपम, ओलेंजेपीन शामिल हैं। 2022-23 के बाद से अस्पताल में डुलोक्सेटीन, फ्लुऑक्सेटीन, टिओनेप्टीन, कार्बामेजोपीन, रिसपेरीडॉन जैसी अवसाद रोधी व मिर्गी के इलाज की दवाओं की किल्लत है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. एलके गुप्ता को सेवानिवृत्त हुए दो साल बीत गए हैं। इसके बाद से सीमित दवाएं ही मानसिक रोगियों के लिए आ रही हैं।
सीमित संख्या में निकाला जा रहा स्टॉक
स्टाफ का कहना है कि दर्द की दवा व खांसी के सिरप पर्याप्त मात्रा में हैं लेकिन अधिकारी सीमित संख्या में ही वितरण के लिए देते हैं। इसके कारण खांसी के सिरप व दर्द के ऑइंटमेंट रोजाना जल्दी खत्म हो जाते हैं। जिला अस्पताल में जो डायक्लोफीनेक जेल फ्री मिलता है। बाजार में उसकी कीमत कम से कम 100 रुपये है। हड्डी रोग से परेशान 50 फीसदी मरीजों को दर्द निवारक जेल बाहर से ही लेना पड़ता है।
मेरी उम्र 58 साल है और मेरा गांव यहां से 25 किलोमीटर दूर है। दाएं पैर की हड्डी में चोट है। डॉक्टर साहब ने दवा तो लिख दी, लेकिन नहीं मिल रही है। सिर्फ गोलियां मिली हैं, दर्द का ट्यूब नहीं मिला। दवा बांटने वाले कह रहे हैं कि ट्यूब खत्म हो गया है। - हरस्वरूप
मेरे पांच साल के बच्चे को डायरिया की शिकायत है और आंखों से पानी निकल रहा है। डायरिया की दवा मिल गई है लेकिन आई ड्रॉप नहीं है। डॉक्टर ने कहा है कि बाहर मिल जाएगा। - टिंकू
सरकारी अस्पताल में मुझे पाइल्स की दवा नहीं मिली। अब बाहर से लेने जा रही हूं। कुछ टैबलेट यहां से मिल गई हैं। लोशन और गर्म पानी वाला लिक्विड बाहर से लेना होगा। - सीमा
मेरे दाएं हाथ में चोट लगी है। दर्द की दवाई अस्पताल में नहीं मिल रही है। न तो यहां एस्सिक्लोफीनेक टैबलेट मिली और न ही डायक्लोफीनेक ट्यूब है। - अरबाज हुसैन