अपने प्रदेश अध्यक्ष को यहां से चुनाव मैदान में उतारकर कांग्रेस ने मुरादाबाद लोकसभा सीट पर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। इसके साथ ही यह सीट कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। राजबब्बर के चुनाव मैदान में उतरने से मुरादाबाद लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें रहेंगी।
राजबब्बर के आने से कार्यकर्ताओं में जोश है, लेकिन अपने प्रदेश अध्यक्ष को चुनावी वैतरणी पार कराने की चुनौती भी इन्हीं कार्यकर्ताओं के कंधों पर आ गई है। 1999 से चुनावी राजनीति में उतरे फिल्म अभिनेता और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को अभी तक सिर्फ एक बार शिकस्त का सामना करना पड़ा है। 1999 से 2009 तक वह दो बार आगरा से सांसद रह चुके हैं।
2009 में उन्होंने फिरोजबाद से चुनाव जीता और सांसद बने। लेकिन 2014 की मोदी की आंधी में वह गाजियाबाद का चुनाव भाजपा के जनरल वीके सिंह से हार गए। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। अब 2019 में कांग्रेस ने उन्हें मुरादाबाद से चुनाव मैदान में उतारा है। उनके नाम का एलान होने के बाद से कांग्रेसियों में उत्साह है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष की हार-जीत के मायने पार्टी के छोटे ओहदेदारों से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक सभी को पता है।
ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगी। कांग्रेस इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंकेगी। राजबब्बर के नाम का एलान होने के बाद दूसरे सियासी खेमों में भी हलचल है। जाहिर है कांग्रेस प्रत्याशी का नाम तय होने के बाद बाकी दल भी नए समीकरणों के हिसाब से अपनी रणनीति तैयार करेंगे।