मुरादाबाद अस्पताल का आईसुलेशन वाडऱ्
- फोटो : अमर उजाला
‘आइसोलेशन वार्ड यानी जिंदा लाशों का कमरा’...। खबर छपने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा तो आनन फानन में सफाई कराई गई। फर्श से खून के धब्बे साफ करने की कोशिश की गई। अब तक जो मरीज खून से सनी चादर ओढ़े बेसुध पड़े थे, उन्हें उठाकर बैठा दिया गया।
अस्पताल के जो लोग कमरे में खाना फेंककर चले आते थे, वो मरीज कोहाथों में खानेपीने का सामान देकर चले आए। सफाई के नाम पर बस खानापूरी की गई, जिस तरह से वार्ड की हालत सुधारी जानी चाहिए थी, वो नहीं किया गया।
जिला अस्पताल के तीसरे फ्लोर पर टीबी वार्ड के बगल में स्थित आइसोलेशन वार्ड में पांच मरीज भर्ती हैं। लेकिन इस वार्ड की हालत बेहद डरावनी थी। फर्श पर जगह-जगह खून के धब्बे पड़े थे। मरीजों को ओढ़ने के लिए गंदी और खून से सनी चादरें दी जा रही थीं।
कमरे में इतनी दुर्गंध थी कि कमरा खोलते ही चक्कर आ जाए। अमर उजाला की टीम ने मरीजों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने वार्ड को इंसानों के रहने लायक बनाया। एक दिन पहले तक यह कमरा जिंदा लाशों का कमरा बना हुआ था।
वार्ड में गंदगी और दुर्गंध से कोई आता-जाता नहीं था। मरीज इसी के अंदर पड़े रहते थे। उन्हें खाना भी बाहर बुलाकर दिया जा रहा था। वार्ड में भर्ती मरीजों में तीन महिलाएं व दो पुरुष मरीज हैं। इनमें से दो को अपना नाम पता मालूम है, दो अज्ञात हैं।