मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 17.5 एकड़ चकरोड की जमीन वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। कमिश्नर की कोर्ट ने इस मामले में एसडीएम टांडा के आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके तहत जमीन विश्वविद्यालय को दी गई थी। कमिश्नर के निर्देश पर रामपुर के जिलाधिकारी ने प्रकरण में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की शुरुआत करते हुए संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से 24 जुलाई 2012 को एसडीएम टांडा के समक्ष वाद दायर करके चकरोड की जमीन विनियम के आधार पर मांगी गई थी। एसडीएम टांडा ने 13 सितंबर 2012 को सामुदायिक उपयोग की 17.5 एकड़ भूमि के विनियम की अनुमति देकर उसे ट्रस्ट को दे दिया था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद 20 सितंबर 2017 को भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी।
मुख्यमंत्री द्वारा मामले में संज्ञान लिए जाने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद, प्रयागराज में चार वाद दायर कराए थे। तीन अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। 20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खां ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। जिसमें जिलाधिकारी के साथ-साथ आकाश सक्सेना को भी प्रतिवादी बनाया गया था।
26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। 23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड ने अपने फैसले में मुरादाबाद कमिश्नर को इस वाद को चार हफ्ते में निस्तारित करने का आदेश दिया। कमिश्नर की कोर्ट ने दो सितंबर को एसडीएम टांडा द्वारा जौहर ट्रस्ट को दी गई सरकारी चकरोड के जमीन के आदेश को निरस्त कर दिया है।