मुरादाबाद। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन पिछले 40 दिनों से इनकी नसबंदी का काम ठप पड़ा हुआ है। मझोला में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड का एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर बनाया गया है। अभी तक वह हैंडओवर नहीं हो पाया है। निगम के अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया को पूरा होने में अभी 15-20 दिनों का समय और लगेगा।
निगम अपने पुराने सेंटर को ही सक्रिय करके कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा होने और पुराने सेंटर के शुरू होने में भी दस से 12 दिन का समय लगेगा। निगम ने नौ जुलाई को ही यह काम करने वाली कंपनी का अनुबंध खत्म किया था। इसके बाद टेंडर निकालकर नई कंपनी से अनुबंध करने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि तीन कंपनी ने आवेदन किया है। इनके फार्म जांचे जा रहे हैं। जल्द ही अनुबंध पूरा कर लिया जाएगा।
दूसरी ओर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे बुरी स्थिति पॉश कॉलोनियों और पुराने शहर की है। जहां रात के समय कुत्तों का झुंड मौजूद रहता है और राहगीरों के साथ स्थानीय निवासियों के लिए भी खतरा साबित होता है। बुद्धि विहार, रामंगगा विहार की कॉलोनियों में शाम होते ही अभिभावक बच्चों को घर से बाहर निकालने में झिझकते हैं। पार्कों में भी बच्चे तभी जाते हैं जब माता-पिता साथ हों।
पुराने शहर के जामा मस्जिद, कटघर, इंद्रा चौक, पीरगैब, गलशहीद जैसे इलाके में रात के समय लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। वहां के रहने वाले अनस, फाहयान, तशकील, अबूजर आदि का कहना है कि कुत्तों का झुंड बाइक और साइकिल सवारों को दौड़ा लेता है। कई बार लोग गिर चुके हैं और उन्हें काफी चोट भी आ चुकी है।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि बंगला गांव में पुराने सेंटर पर 30 कुत्तों की नसबंदी की व्यवस्था है। जल्द ही इस सेंटर का संचालन शुरू हो जाएगा। वहीं, मैनाठेर में बने एबीसी सेंटर का संचालन अगले महीने के पहले सप्ताह तक शुरू हो सकता है। निगम की टीम अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ने का काम करेगी।