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गुटखे में मिला रहे हैं चाइनीज केमिकल गेम्बिलर, एफएसडीए की जांच में हुआ खुलासा

Sun, 06 Jan 2019 01:39 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मुरादाबाद
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Gutkha - फोटो : फाइल फोटो
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शहर में बेचे जा रहे गुटखे में खतरनाक के मिकल और खराब सुपाड़ी मिलाए जाने की शिकायतें की गई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अगस्त 2018 में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने शहर के प्रमुख स्थानों से गुटखे के सात पैकिट लिए थे। इन पैकिटों की प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट चौकाने वाली है, जिसमें गुटखा को जानलेवा बताने के साथ-साथ चाइनीज केमिकल गेम्बिलर मिलाए जाने की पुष्टि की गई है।

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मुख्य खाद्य निरीक्षक एम के त्रिपाठी ने बताया कि गेम्बिलर चाइनीज केमिकल तेजाब की तरह तीखा होता है। इसे खाने के लिए नहीं बल्कि चमड़े को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दो साल से प्लास्टिक के स्थान पर कागज की पैकिंग होने की वजह से इस केमिकल को ज्यादा मिलाया जा रहा है। क्योंकि यह केमिकल गुटखा में लाल रंग नहीं छोड़ता है। जबकि कत्था एक डेढ़ महीने के अंदर ही लाल रंग छोड़ देता है, जिसकी वजह से पैकिंग खराब हो जाती है। दूसरा कारण तेजाब और तीखापन होने के कारण यह केमिकल लोगों को आदी बना देता है।

दिसंबर के महीने में प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद इस कंपनी को कानपुर में नोटिस भेजा गया था। लेकिन उस नाम और पते पर कंपनी नहीं मिली। ऐसे में विक्रेता को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। गुटखे में जानलेवा गेम्बिलर केमिकल पाए जाने पर कंपनी और विक्रेता केखिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए खाद्य एवं सुरक्षा आयुक्त से अनुमति मांगी गई है।
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लिवर और गुर्दे को क्षति पहुंचाता है गेम्बिलर
जिला अस्पताल केफिजीशियन प्रवीण शाह का कहना है कि कत्थे केस्थान पर इस्तेमाल किए जाने वाला गेम्बिलर केमिकल शरीर के अंदर पाचन शक्ति को क्षीण करता है। आगे चलक लिवर और गुर्दे को क्षति पहुंचाते हैं। जिसकी वजह से कैंसर रोग हो सकता है। इतना ही नहीं त्वचा रोग भी हो सकता है।

10 साल की सजा का है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अधिनियम में अनसेफ या जान लेवा पदार्थ मिलाने की पुष्टि होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय से 10 साल की सजा और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस अधिनियम में कार्रवाई के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि से अनुमति ली जाती है। साथ ही आरोपी को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण भी लिया जाता है। उसी के बाद अभिहित अधिकारी एफएसडीए की ओर से न्यायालय में सीधे मुकदमा दर्ज किया जाता है।

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