मुरादाबाद। नवजात अवस्था में मिली तीन साल की मासूम को आकाश और दीपा अपनी औलाद की तरह सीने से लगाकर पाला पर शनिवार को यह परिवार बुरी तरह से फूट फूट कर रोया। हलक से एक निवाला तक नहीं उतरा। कारण कि इस मासूम को एएचटीयू अपने साथ ले गई। यह कहकर कि बच्ची कानूनी तौर पर इस परिवार के पास नहीं थी। मासूम को बाल शिशु गृह में भेजा गया और इधर आकाश और दीपा का पूरा परिवार रात भर उसकी याद में जागता ही रहा। उन्होंने कहा कि कानूनी तरीके से ही सही पर बच्ची को उन्हें ही सौंपा जाए।
सिविल लाइंस आदर्श कालोनी निवासी आकाश ने बताया कि 17 मार्च 2016 को वह सुबह टहलने के लिए तहसील के पास गए थे। उन्होंने वहां देखा कि एक बच्ची सड़क किनारे पड़ी है। वह उसके पास पहुंचे और एक कपड़े में लपेटकर बच्ची को अपने घर ले आए। उनकी पत्नी ने बच्ची को सीने से लगा लिया। सभी ने कहा कि यह कुदरत की देन है। इस बच्ची को अपनी बच्ची की तरह ही पालना। इसके बाद कभी नहीं सोचा कि बच्ची हमारी नहीं है। आकाश ने बताया कि मेरे दो बेटे और एक बेटी और है। इसके बावजूद बच्ची को किसी को नहीं दिया। उसके नाम पर प्लाट भी खरीद लिया है ताकि बालिग होने पर उसके काम आए। आकाश के मुताबिक उसका एक रिश्तेदार से विवाद चल रहा है। उसने शिकायत की जिस पर शनिवार दोपहर एएचटीयू की टीम उसके घर पहुंची और बच्ची को ले आई। इसके बाद बच्ची बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश की। यहां से बच्ची को शिशु गृह भेजने का निर्णय लिया तो आकाश और उसके परिजन फूट फूट रोए।
एक शिकायत आई थी बच्ची को गैर कानूनी तरीके से एक घर में रखा गया है। भविष्य में उसके साथ अनहोनी हो सकती है। इसी शिकायत पर बच्ची को बरामद कर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया है।
सुबोध कुमार, प्रभारी एएचटीयू
एएचटीयू ने रेस्क्यू कर एक बच्ची को एक घर बरामद कर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। आकाश कोई कानूनी कागजात नहीं दिखा पाया है। बच्ची को शिशु गृह भेजा गया है। तीन माह तक बच्चे के परिवार की तलाश की जाएगी। इसके बाद गोद देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
नीतू सक्सेना, सदस्य, बाल कल्याण सीमित
इस तरह मिल सकती है बच्ची
किशोर न्याय अधिनियम धारा 27 जेजे एक्ट के तहत जिला अधिकारी के समक्ष पेश होकर बच्ची को लेने की अपील की जा सकती है। कमेटी सभी दावेदारों के दावों का परीक्षण करेगी और बच्ची के बेहतर भविष्य को देखकर ही निर्णय लेगी।