53 लाख की जमीन हड़पने के लिए रची थी साजिश
त्रिवेणी देवी की पुश्तैनी चार बीघा जमीन शहर से लगी थी। उसको 60 लाख रुपये में बेच दिया था और बदायूं के गांव परौली में 11 बीघा जमीन 53 लाख रुपये की खरीद ली थी, उस समय पर कब्जा ग्रामीणों ने नहीं होने दिया। इसलिए त्रिवेणी देवी और दोनों बेटे परेशान थे।
इसकी जानकारी प्रेमपाल सिंह को लगी तो वह काफी समय पहले त्रिवेणी के घर पहुंचा और जमीन खरीदने की बात कही थी। एक लाख रुपया भी एडवांस दिया और तीन महीने में जमीन का पूरा भुगतान करने और नाम कराने की बात कही थी।
समय पूरा हो गया तो प्रेमपाल सिंह ने जमीन का बैनामा कराने की बात कही और बैनामा होने के बाद भुगतान करने के लिए कहा। इस पर त्रिवेणी और उनके दोनों बेटे राजी नहीं हुए। इसलिए उसने 27 जुलाई की रात को गोली मारने की झूठी कहानी रच डाली।
किसी ने नहीं सुनीं फरियाद, बताया आरोपी
त्रिवेणी देवी ने बताया कि वह अपने बेटों के बेगुनाह होने की फरियाद लेकर संभल, मुरादाबाद और बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक गईं लेकिन सुनी किसी ने नहीं। सभी ने बेटों को दोषी बताया। लेकिन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मेरी फरियाद सुनी।
पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के लिए निर्देश दिए। जांच तो निष्पक्ष कर दी और बेटे बेगुनाह साबित हो गए लेकिन जो गुनाहगार थे उन्हें जेल जाने से पहले ही जमानत दे दी गई।
फिल्मी पटकथा जैसी है शरीर में गोली प्लांट कराने की कहानी
प्रेमपाल की कमर में घाव करने के लिए निजी अस्पताल का कंपाउंडर आमिर आया और उसने घटनास्थल पर पहुंचकर पहले कमर में घाव किया और फिर इस्तेमाल की गई 315 की गोली अंदर कर दी। इस साजिश को न पुलिस समझ सकी और न चिकित्सक। या यूं कहा जाए कि समझना ही नहीं चाहा। बेगुनाह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और फिर प्रताड़ित कर गोली मारने की बात तक कबूल कराई।
तीनों को साजिशन फंसाया गया था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया तो प्रेमपाल सिंह और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। तमंचा पुलिस ने दिलीप के कब्जे से बरामद किया था। उसके आधार पर कार्रवाई अलग से है। -कुलदीप सिंह गुनावत, एसपी, संभल