नामांकनपत्रों के दाखिले के साथ ही निकाय चुनाव की धुंधली तस्वीर अब साफ हो चुकी है। सपा के गढ़ कहे जाने वाले मुरादाबाद मंडल में निकाय चुनाव के रण में दिग्गजों की असल परीक्षा होगी। क्योंकि मोदी-योगी लहर में भी मंडल में सपा अपना किला बचाने में सफल रही थी। फिलहाल मंडल में सपा के तीन सांसद (एक राज्यसभा सांसद) और 16 विधायकों के लिए गढ़ बचाने की चुनौती होगी।
मुरादाबाद मंडल को यूं नहीं सपा का गढ़ कहा जाता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी-योगी की लहर के आगे सपा पचास का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। पार्टी को बुरी हार सामना करना पड़ा। लेकिन मोदी-योगी के इस आंधी में भी सपा मंडल की 27 में से 13 सीटें जीतने में सफल रही थी। यहीं नहीं 2023 के विधानसभा चुनाव में सपा की सीटें 13 से बढ़कर 17 हो गईं। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर मंडल की सभी छह सीटें जीत ली। इसमें सपा और बसपा के खाते में तीन-तीन सीटें आईं।
लेकिन इस बीच सपा को अपने गढ़ में हार का सामना भी पड़ा। पार्टी को पहले रामपुर लोकसभा सीट और फिर रामपुर विधानसभा सीट गंवानी पड़ी। इससे विधायकों की संख्या घटकर 16 और सांसदों की संख्या दो हो गई है। ऐसे में बदले समीकरण और हालात में निकाय चुनाव में गढ़ को बचाने सपा के दिग्गजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी।