सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम समाज के समग्र विकास की दिशा में एक निर्णायक परिवर्तन है। इससे समाज के हर तबके को सटीक आंकड़ों के आधार पर नीति निर्माण में भागीदारी मिलेगी। आजादी के बाद यह पहली बार है जब जातिगत गणना को जनगणना का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे पहले कांग्रेस सरकारों ने हमेशा इस विषय को टालते हुए केवल आधे-अधूरे सर्वे कराए। जिनमें वैज्ञानिक प्रक्रिया और पारदर्शिता का अभाव था।
उन्होंने कहा कि 2011 में कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए सर्वे पर 4893.60 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन उसमें 8.19 करोड़ गलतियां थीं और परिणाम सार्वजनिक नहीं किए गए। विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस, आरजेडी व इंडी गठबंधन ने जातिगत जनगणना के मुद्दे का केवल राजनीतिक उपयोग किया। जब वह सत्ता में थे तब कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने जातिगत सर्वे कराया, लेकिन अब तक उसके आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं किए गए।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा ने कभी भी जातिगत जनगणना का विरोध नहीं किया। बिहार में भाजपा ने जातिगत जनगणना का समर्थन किया था। गृहमंत्री अमित शाह ने भी 18 सितंबर 2024 को कहा था कि सरकार इसका निर्णय समय पर घोषित करेगी।
ओबीसी, अन्य जातियों का डाटा नहीं हुआ प्रकाशित
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 1931 तक भारत में जातिगत जनगणना होती थी। 1941 में आंकड़े जुटाए गए थे, लेकिन प्रकाशित नहीं किए गए। 1951 से 2011 तक केवल एससी, एसटी का डेटा प्रकाशित हुआ। ओबीसी और अन्य जातियों का नहीं।
करोड़ों दलितों का अपमान कर रही सपा
सोशल मीडिया में डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र के साथ वायरल हो रहे सपा मुखिया के फोटो पर टिप्पणी करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा अपने नेता अखिलेश यादव को बाबा साहब के बराबर दिखाने का प्रयास कर रही है। यह करोड़ों दलितों का अपमान है। उन्होंने कहा कि सपा का ट्रैक रिकाॅर्ड बताता है कि सबसे अधिक दलितों का उत्पीड़न सपा सरकार में किया गया।
आजम खां पर लगाया बाबा साहब को भूमाफिया बताने का आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा सरकार हमेशा दलित विरोधी रही है। आरोप लगाया कि सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खां सार्वजनिक बयानबाजी करके डॉ. भीमराव आंबेडकर का न सिर्फ अपमान कर चुके हैं बल्कि उन्हें भूमाफिया तक घोषित कर चुके हैं।