मुरादाबाद। अगस्त प्रस्ताव, क्रिप्स मिशन, शिमला सम्मेलन, कैबिनेट मिशन योजना, इन घटनाओं को सही कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए। आरओ (समीक्षा अधिकारी)/एआरओ (सहायक समीक्षा अधिकारी) की परीक्षा में पूछे गए इस तरह के प्रश्नों से काफी अभ्यर्थी चकरा गए। अभ्यर्थियों ने बताया कि घटनाओं को सही कालक्रम में रखना और सूची का मिलान करने वाले प्रश्नों को हल करने में काफी मशक्कत हुई।
जिले के 61 केंद्रों पर रविवार को आरओ/एआरओ की परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित की गई। अभ्यर्थियों ने एक तिहाई अंक की माइनस मार्किंग के डर से कई सवालों को छोड़ दिया। अभ्यर्थियों ने बताया कि कुछ सवालों के विकल्प काफी उलझाऊ थे इसलिए उनको समझने में काफी समय लगा।
महाराजा हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, दयानंद डिग्री कॉलेज, चित्रगुप्त इंटर कॉलेज, अंबिका प्रसाद इंटर कॉलेज, पारकर इंटर कॉलेज समेत अन्य केंद्रों पर आरओ/एआरओ की परीक्षा सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक चली। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का कहना था कि कुछ सावल कठिन पूछे गए थे। कई सवाल ऐसे थे जिसके जवाब देना बहुत मुश्किल हो गया। कई अभ्यर्थियों ने पेपर के 55 प्रतिशत सरल तो कई ने 40 प्रतिशत सरल बताया। दयानंद डिग्री कॉलेज में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी शुभम कुमार ने बताया कि अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई करने की वजह से हिंदी के सवालों के जवाब नहीं दे पाए। हिंदी के सवाल काफी कठिन लग रहे थे।
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17628 अभ्यर्थियों ने छोड़ी आरओ और एआरओ की परीक्षा
- जिले में आयोजित आरओ और एआरओ की परीक्षा 17628 अभ्यर्थियों ने छोड़ दी। कुल 9360 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा में 26988 अभ्यर्थियों को शामिल होना था।
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वर्जन
- जीके के प्रश्न काफी उलझाऊ लग रहे थे। इसके कारण जीके के पांच सवाल के जवाब ही दे पाया। माइनस मार्किंग के कारण कई सवालों को हल नहीं किया।- अनूप कुमार, बरेली
-आरओ और एआरओ की परीक्षा की तैयारी ठीक ढंग से नहीं कर पाया था। इसलिए करीब 90 सवाल ही कर पाया। क्योंकि पीजीटी की तैयारी कर रहा था। पीजीटी की परीक्षा भी नहीं हुई।- शिवम गुप्ता, बरेली
-पिछली बार हुए आरओ और एआरओ की परीक्षा की तुलना में इस बार प्रश्न कठिन आया था। इसके कारण पेपर हल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।- राजेंद्र श्रीवास्तव, बरेली
- सही क्रम में व्यवस्थित करने से संबंधित प्रश्नों को हल करने में परेशानी हुई। माइनस मार्किंग के कारण इस तरह के सवालों को छोड़ना पड़ा।- हेमंत पाठक, बरेली
- हिंदी की तैयारी ठीक थी इसलिए हिंदी के सभी सवालों को हल किया। लेकिन जीएस के सवालों ने काफी उलझाया। ओवर ऑल पेपर ठीक ही हुआ है।- स्नेहा सिंह, रामपुर
-पेपर में कुछ सवाल घुमावदार थे इसलिए उन्हें हल करने में 10 से 15 मिनट लग गए। कुल मिलाकर करीब 100 प्रश्न ही हल हो पाए।- राम मौर्या, अमरोहा