कांठ। तहसील क्षेत्र के कई गांवों में तेंदुओं की दहशत बरकरार है। वन विभाग द्वारा तेंदुओं को पकड़ने के लिए दो स्थानों पर लगाए गए पिंजरे कई दिन से ऐसे ही खाली रखे हुए हैं। इनमें से किसी भी पिंजरे में तेंदुआ नहीं आया है। क्षेत्र के लोगों ने दिखाई दे रहे तेंदुओं के खौफ से निजात दिलाने की मांग की है।
कांठ के गांव कोकरपुर, दयानाथपुर, गोविंदपुर ज्ञानपुर, खलीलपुर कद्दीम, कुरी रवाना, फत्तेहपुर बिश्नोई, मुख्त्यारपुर नवादा, गढ़ी, सलेमपुर, मिश्रीपुर, महदूद कलमी, दरियापुर, राजीपुर खद्दर आदि गांवों के आसपास लगातार तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। किसान अपने खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। 31 जुलाई को वन विभाग की टीम ने कांठ गांव खलीलपुर कद्दीम के पास और दो अगस्त को छजलैट के कुरी रवाना में तेंदुआ पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था। लेकिन अबतक दोनों स्थानों पर पिंजरे खाली हैं। डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को क्षेत्र के गांव गोविंदपुर ज्ञानपुर में भी पिंजरा लगाया जाएगा। अजय यादव, विकास यादव, श्रीओम सिंह, दीप सिंह, दीपक कुमार, वकील अहमद, अंकुश कुमार आदि ग्रामीणों ने तेंदुए के खौफ से निजात दिलाने की मांग की है। संवाद
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तेंदुए के हमले से एक किसान की मौत, अब तक 11 घायल
कांठ। पिछले दिनों तेंदुओं द्वारा कांठ और छजलैट क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर किए गए हमलों में मासूम बच्चों सहित 11 लोग घायल हो गए थे। साथ ही पिछले वर्ष मई 2025 में छजलैट के नक्संदाबाद निवासी किसान दलवीर सिंह पर तेंदुए द्वारा किए गए हमले में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद 23 मार्च 2026 को गांव फतेहपुर विश्नोई के विजेंद्र सिंह पर, 30 मार्च को घर में घुसकर गांव महदूद कलमी की दो वर्षीय सिदरा पर, 31 मार्च को घर में घुसकर गांव मिश्रीपुर की आठ वर्षीय दीपांशी, 11 अप्रैल को गांव दरियापुर के तीन वर्षीय हर्ष, 16 अप्रैल को गांव फजलाबाद के पांच वर्षीय लव्यांश, 27 अप्रैल को गांव राजीपुर खद्दर की छह वर्षीय दीया, 28 अप्रैल को गांव रायपुर खुर्द के कपिल देव सिंह, 16 मई को गांव मुजफ्फरपुर टांडा के 13 वर्षीय लोकेंद्र कुमार, 20 मई को गांव पाइंदापुर की 50 वर्षीय फूलवती व गांव छजलैट के मनीष कुमार और 30 जून को खेत में चारा लेने गई गांव गोपालपुर की 17 वर्षीय सानिया पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। संवाद
क्षेत्र के लोगों और किसानों से अपील की है कि वह इस समय गन्ने के खेतों में अकेले कार्य करने के लिए न जाएं। गन्ने के खेत तेंदुए के छिपने का सुरक्षित स्थान है। इसलिए किसान खेतों में अकेले काम न करें। तीन-चार किसान एक साथ जाएं और काम करते समय आपस में बात करते रहें। मोबाइल में तेज आवाज में गाने चलाएं, पास में लाठी-डंडे रखें, छोटे बच्चों को खेतों पर न ले जाएं, जंगल जाने के लिए समूह के रूप में जाएं। उन्होंने अपील है कि यदि कहीं तेंदुआ दिखाई दे तो सूचना दें। उन्होंने बताया कि लगातार क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कांवड़ यात्रा दृष्टिगत होर्डिंग भी लगाए गए हैं। - पुष्पेंद्र सिंह, डिप्टी रेंजर, वन विभाग