मुरादाबाद। सरकार की सख्ती के बाद भी अफसरशाही संभल में आगजनी और बवाल की घटना को होने से नहीं रोक सकी। मुरादाबाद में भी रोक के बावजूद प्रदर्शन हुए। स्थानीय सांसद डा. एसटी हसन ने नागरिकता संशोधन कानून की प्रति जलाकर विरोध किया तो सपा नेताओं और वामपंथी संगठनों ने प्रशासन की रोक को धता बताकर सड़कों से लेकर कलक्ट्रेट तक प्रदर्शन भी किया। संभल की घटना सीएम की जुबान पर है। मुमकिन है कि आने वाले दिनों में इसकी गाज कुछ हाकिमों पर गिरे। दरअसल अफसरशाही इंटेलीजेंस इनपुट के बावजूद आखिरी वक्त तक विपक्षी दलों के कुछ स्थानीय नेताओं को साधने की कोशिशों में जुटी रही। इन नेताओं ने अमन बनाए रखने का यकीन दिलाकर अफसरों से अपने कामों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त तो मनवा लीं लेकिन ऐन वक्त पर प्रशासन को इनकी मदद नहीं मिल सकी।
विपक्षी दलों के नेताओं पर अति विश्वास की वजह से अफसर चूक गए। सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं ने अमन बनाए रखने का यकीन अफसरों को दिलाया था उन्हीं नेताओं ने लखनऊ पहुंचकर मामले को हवा दी। जब हालात बिगड़ने लगे तो खुद के शहर से बाहर होने की बात कहकर अफसरों को झांसा दिया कि उनका इस मामले से लेनादेना नहीं है। गुरुवार को संभल में हुई आगजनी और पथराव की घटना से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खासे खफा हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सीएए का मामला ठंडा होने के बाद संभल के अफसरों पर गाज गिरना तय है। शुक्रवार को जुमे की नमाज होनी है। गुरुवार को संभल में जो हुआ उसे देखते हुए शासन की नजरें खास तौर पर मुरादाबाद मंडल पर टिकी हैं। एडीजी कानून व्यवस्था ने गुरुवार को यहां दौरा करके शुक्रवार को लेकर की गई तैयारियों का जायजा लिया है। शासन ने ऐसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश अफसरों को दिए हैं। उधर, तमाम कोशिशों के बाद भी पुलिस - प्रशासन सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे जहर को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। बहरहाल शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले पुलिस सभी खामियों को दुरुस्त कर लेना चाहती है।