गजरौला के ब्रजघाट पर पूर्णिमा पर स्नान का नजारा ।
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बौद्ध धर्म के अनुयायी बुधवार को बुद्ध पूर्णिमा उत्सव धूमधाम से मनाएंगे। बुद्ध जी के आदर्शों पर चलने वाली संस्थाएं कल विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती) के नाम से जाना जाता है। पुरोहितों के अनुसार इस दिन गंगा में स्नान करके कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 10 मई को बुद्ध पूर्णिमा है। शास्त्रों के अनुसार बुद्ध जी भगवान विष्णु के नौंवे अवतार है। वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन बिहार के पवित्र तीर्थ स्थान बौधगया में बोधि पेड़ के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
तभी से इस पूर्णमासी को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस पावन पर्व पर गंगा में स्नान व दान पुण्य करके मनुष्य को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही उनके पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है।
शिव शक्ति मंदिर रामगंगा विहार के पंडित हेमंत भट्ट ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध की जयंती व निर्वाण दोनों का दिन है। 12 माह में होने वाली प्रत्येक पूर्णिमा का अपना महत्व है लेकिन बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने अपने नौंवे अवतार के रूप में जन्म लिया था इसलिए इस तिथि का महत्व और अधिक हो जाता है।
गंगा में स्नान, दान, पूजा पाठ, व्रत व तर्पण अािद से मनुष्य पाप मुक्त होता है, उसे मोक्ष मिलता है व पितरों को शांति भी प्राप्त होती है। भगवान बुद्ध ने हमेश अहिंसा, शांति का मार्ग अपनाया था हमें भी इसी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।