मुरादाबाद। अमेरिकी रुख से निराश पीतल कारोबारियों को अब खाड़ी देशों से आस बंधी है। निर्यातक कारोबार के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। क्योंकि पचास फीसदी टैरिफ के बाद अमेरिका में पीतलनगरी उत्पादों का शेयर भी आधा ही रह गया है।
जिला उद्योग केंद्र के रिकॉर्ड के मुताबिक पीतलनगरी के निर्यात का 60 प्रतिशत कारोबार का आधार अकेले अमेरिका में है। वर्ष 2025 में यह घटकर आधा यानी 30 प्रतिशत ही रह गया। इसकी वजह से निर्यातक, कारखानेदार, कारीगर सभी परेशान हैं। निर्यातक बताते हैं कि ट्रंप की टैरिफ मार से अमेरिका में हमारे उत्पाद पहले से ही महंगे हैं।
अब अगर अमेरिका ने धमकी के मुताबिक 500 प्रतिशत टैरिफ का फॉर्मूला लागू किया तो नुकसान कई गुना बढ़ जाएगा। काम को बचाने के लिए गल्फ देशों समेत अन्य वैकल्पिक बाजारों का रुख करना जरूरी है और मजबूरी भी। बड़ी संख्या में निर्यातकों ने अब खाड़ी देशों में बाजार तलाशना या कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है।
इन देशों पर जोरःःः यूरोप व एशियन देशों के अलावा जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत कुछ अन्य देशों में निर्यात बढ़ाने के प्रयास हैं।
बंद हो सकती हैं छोटी फैक्टरियां, छिनेगा कई का रोजगार
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के अनुसार, मुरादाबाद के करीब 2.50 लाख लोग हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से जुड़े हैं। निर्यातकों का कहना है कि अगर 500 प्रतिशत की टैरिफ लगाई गई तो मुरादाबाद में छोटी फैक्टरियां बंद होने की नौबत आ जाएगी। आधे से ज्यादा लोगों का रोजगार छिन जाएगा। अमेरिका के 50 प्रतिशत की टैरिफ की वजह से ही मुरादाबाद में कई का रोजगार जा चुका है।
निर्यातक बोलेः
अमेरिका में हस्तशिल्प उत्पाद के निर्यात को लेकर साल 2025 में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। निर्यातक अब केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेंगे। इसलिए निर्यातकों ने खाड़ी देशों की ओर रुख किया है। बड़ी संख्या में निर्यातक वहां सैंपल भेजने की तैयारी भी कर रहे हैं। - सुरेश कुमार गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी
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अमेरिका को छोड़कर अन्य देशों में हस्तशिल्प उत्पादों के लिए बाजार तलाशा जा रहा है। अमेरिका की महंगाई से अब फैक्टरियों में उत्पादन चुनौती भरा हो गया है। अमेरिका की 500 रुपये टैरिफ की शर्त लागू हुई तो वहां उत्पाद और महंगा हो जाएगा। वहां खरीदार मिलने मुश्किल हो जाएंगे। लिहाजा यूरोप के साथ नए देशों में काम का शेयर बढ़ाना मजबूरी है। - सतपाल, सचिव, द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
लैटिन अमेरिका, आस्ट्रेलिया और यूके से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) साइन हो चुका है। हॉलैंड व जर्मनी में एक्सपो केंद्र जगह-जगह खोले जा रहे हैं। खाड़ी देशों में एक्सपो की तैयारी शुरू कर दी गई है। जहां पर पीतलनगरी के हस्तशिल्प उत्पाद डिस्प्ले होंगे। इससे बिचौलिये को सामान न बेचकर सीधे इंपोर्टर को दिया जाएगा। -अवधेश अग्रवाल, मुख्य संयोजक, ईपीसीएच
पीतलनगरी के हस्तशिल्प उत्पादों का अब एशिया, यूरोप समेत कई देशों में अधिक निर्यात किया जाएगा। हस्तशिल्प उत्पाद को ग्लोबल हैंडीक्राफ्ट हब बनाना होगा। तभी हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात बढ़ेगा। अमेरिका को छोड़कर अन्य देशों के बाजार में उत्पादों को बेचने की बात चल रही है। - नावेद उर रहमान, अध्यक्ष मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन