कारखानेदारों की नजर लंदन मेटल एक्सचेंज पर
पीतलनगरी के कारखानेदारों की नजर लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर है। यहीं से कच्चे माल (धातुओं) की कीमत तय होती है। रोजाना रेट जारी होता है। कारोबारी रुपये के मुकाबले डॉलर की लगातार मजबूती को भी इस महंगाई का कारण मान रहे हैं।
कच्चे माल की कीमतों में उछाल से कारखानेदार खराब दाैर से गुजर रहे हैं। लगातार निर्यात मेले हो रहे हैं लेकिन निर्यातकों को ऑर्डर नहीं मिल रहे। हैं। इसका सीधा असर कारखानों पर पड़ रहा है। साथ ही सिल्ली की महंगाई से करीब 50 फीसदी कारखाने बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। - आजम अंसारी, अध्यक्ष, मुरादाबाद कारखानेदार एसोसिएशन
कारखानेदारों के पास कच्चे माल के ऑर्डर नाम मात्र के रह गए हैं। न तो विदेशी बाजार में डिमांड है और न ही घरेलू बाजार में कच्चे माल की मांग बची है। जो माल फर्मों को जा भी रहा है उसका भुगतान नहीं हो पा रहा। - नोमान मंसूरी, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी
हस्तशिल्प उत्पादों के लिए कच्चे माल की जरूरत होती है। चार महीने पहले पीतल की सिल्ली की कीमत 590 रुपये प्रति किलो थी। अब यह कीमत 750 रुपये तक पहुंच गई है। निर्यातक टैरिफ की मार से पहले से परेशान हैं। सिल्लियों की महंगाई से कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। - नवेद खान, निर्यातक