पीरजादा के कारखाना संचालक रहीस अहमद का कहना है कि 10 वर्षों से तलवार के हैंडल बना रहे हैं। एक पीस हैंडल कई कारीगरों से गुजरकर तैयार होता है। इसलिए काफी समय लगता है। इस तरह के हैंडल के लिए पंजाब से बड़े ऑर्डर आते हैं। तलवार पंजाब की शान है। अमेरिकी सेना में आधुनिक हथियारों के साथ-साथ फौजियों की ड्रेस में तलवार का स्थान है।
करूला निवासी अरमान मलिक ने बताया कि हर दिन 100 से 200 पीस तलवार के हैंडल तैयार कर लेते हैं। ज्यादातर पीतल के होते हैं। ऑर्डर के समय इनकी डिजाइन और फिनिशिंग बताई जाती है। हैंडल बनाने के लिए हर महीने अच्छे ऑर्डर मिल जाते हैं।
पीतल की महंगाई के हिसाब से इसके दाम बदलते रहते हैं। ईदगाह क्षेत्र में रहने वाले कारखानेदार रेहान मंसूरी ने बताया कि हैंडल तैयार करने के लिए पांच से सात कारीगर की जरूरत होती है। एक ढालता तो दूसरा पॉलिश करता है। इस पर पीतलनगरी के हस्तशिल्प के अनुसार आकर्षक नक्काशी भी की जाती है।
तलवार के हैंडल से जुड़े हैं करीब एक हजार कारीगर
शहर के कटघर, पीरजादा, जामा मस्जिद, करूला, ईदगाह समेत अन्य कुछ स्थानों पर करीब एक हजार कारीगर इस काम से जुड़े हैं। करीब 50 कारखानों में तलवार के हैंडल तैयार होते हैं। कारखानेदारों का कहना है कि तलवार का हैंडल बनाने के लिए पीतल और एल्युमिनियम दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि जब से पीतल के दाम बढ़े हैं, तब से एल्युमिनियम के हैंडल ज्यादा बनाए जा रहे हैं। एल्युमिनियम के हैंडल में फिनिशिंग और अच्छी होती है।
तलवार का हैंडल मुरादाबाद से सीधे अमेरिका निर्यात नहीं किया जाता है। इसे अमृतसर भेजा जाता हैं। वहां तलवार में फिट करने के बाद अमेरिका तक का सफर होता है। पहले की अपेक्षा में अब इसका कारोबार कई गुना बढ़ गया है। इसके पीछे का एक बड़ा कारण यह भी है कि पंजाब में भी इसका खूब इस्तेमाल होता है। - फिरोजउद्दीन, कारखानेदार
अमेरिकी सेना में इस्तेमाल की जाने वाली तलवार के हैंडल शहर में बनाए जाते हैं। इन्हें पंजाब भेजा जाता है। वहां पर तलवार तैयार करने के बाद ही अमेरिका निर्यात किया जाता है। इसका कारोबार हर साल बढ़ता जा रहा है। पीतल और एल्युमिनियम दोनों के हैंडल ज्यादा बनाए जा रहे हैं। - सुरेश कुमार गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी