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UP: प्लीज सर... वो जिंदा है, जल्दी दरवाजा तोड़कर उसे बचा लीजिए, वह बच जाएगी; साथी छात्राएं करतीं रहीं मिन्नतें

Fri, 31 May 2024 12:21 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद में पॉलीटेक्निक के हॉस्टल में एक छात्रा का शव फंदे से लटका मिला। छात्रा महोबा की रहने वाली थी। वो कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
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मुरादाबाद में पॉलीटेक्निक की छात्रा ने की आत्महत्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद के राजकीय महिला पॉलीटेक्निक के हॉस्टल के कमरे में बुधवार रात छात्रा काजोल (17) का शव पंखे से लटका मिला है। बुधवार रात मेस में खाना खाने जा रहीं अन्य छात्रा ने काजोल के कमरे का दरवाजा बंद देखा। उन्होंने दरवाजा खटखटाया तो कोई अंदर से जवाब नहीं आया। छात्राओं की सूचना पर प्रिंसिपल धीरेंद्र कुमार यादव और अन्य स्टॉफ पहुंच गया। दरवाजा तोड़कर देखा तो उसका शव लटका था। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर जांच पड़ताल की।
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महोबा जनपद की कुलपहाड़ तहसील पचारा अमनपुरा निवासी काजोल पुत्र हलकुट्टा मुरादाबाद के राजकीय महिला पॉलीटेक्निक में इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड से इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। काजोल का दूसरा सेमेस्टर था। वह हॉस्टल के ब्लाक-सी के कमरा नंबर 10 में अकेली रहती थी। प्रिंसिपल ने पुलिस को बताया कि बुधवार सुबह छात्रा क्लास में नहीं पहुंची थी। 

उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। बुधवार रात अन्य छात्राएं मेस में खाना खाने जा रही थीं, तब उन्होंने देखा कि काजोल के कमरे का दरवाजा अब भी बंद है। परेशान छात्राओं ने झांक कर देखा तो काजोल दुपट्टे के सहारे लटकी दिखाई दी। छात्राओं के शोर मचाने पर वार्डन आ गईं और उन्होंने सूचना देकर प्रिंसिपल को बुला लिया। 
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वहां के स्टाफ और वार्डन ने पीआरडी जवान के सामने दरवाजा तोड़कर देखा तो काजोल दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी थी। इसकी जानकारी मिलने पर एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया और सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर मौके पर पहुंच गए। सीओ सिविल लाइंस अर्पित कपूर ने बताया कि जांच पड़ताल की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रा के परिवार को सूचना दे दी गई है।
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काजोल की दोनों रूम पार्टनर नहीं थीं मौजूद
मुरादाबाद राजकीय महिला पॉलीटेक्निक के प्रिंसिपल धीरेंद्र कुमार यादव ने पुलिस को बताया कि हाॅस्टल के कमरे में काजोल के अलावा दो और छात्राएं रहती थीं। बिजनौर के नगीना निवासी निशा और रामपुर निवासी आशा भी काजोल के साथ रहती थीं। आशा एक सेमेस्टर के बाद वापस ही नहीं आई। दूसरी छात्रा निशा
दस दिन पहले पिता के बीमार होने के कारण पढ़ाई छोड़कर घर चली गई।

अन्य छात्राओं से कम बातचीत करती थी छात्रा
पुलिस की जांच पड़ताल और छात्राओं व प्रिंसिपल से जानकारी मिलने पर पता चला है कि छात्रा यहां 16 सितंबर 2023 को आई थी। पहले उसके रूम में दो अन्य छात्राएं रहती थीं, लेकिन वह दोनों ही छात्राएं चली गईं। अब छात्रा अकेले ही रहती थी। ये भी जानकारी मिली है कि छात्रा अन्य छात्राओं से कम ही बातचीत करती थी।


 

छात्रा का मोबाइल खोलेगा राज
पुलिस को छात्रा के कमरे से एक मोबाइल मिला है। पुलिस ने इस मोबाइल को कब्जे में ले लिया है। पुलिस छात्रा के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा रही है। जिससे पता चल सकेगा कि छात्रा ने अंतिम कॉल किसे की थी और कितनी लंबी बातचीत हुई।

प्लीज सर...वह जिंदा है, जल्दी दरवाजा तोड़कर उसे बचा लीजिए
प्लीज सर...वह जिंदा है। जल्दी से दरवाजा तोड़ दीजिए और बचा लीजिए। वह बच जाएगी सर...। काजोल के जीवित होने की उम्मीद में उसकी साथी छात्राएं इन्हीं शब्दों को बोलकर बार-बार प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से गुहार लगा रहीं थीं। लेकिन वह उन्हें इस तरह छोड़कर चली जाएगी, ऐसी किसी को उम्मीद नहीं थी। काजोल के आत्मघाती कदम उठाने के बाद बृहस्पतिवार शाम तक छात्राएं खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षक छात्राओं से मिलकर उनको हिम्मत दे रहे थे।
 

हमेशा छात्राओं की हंसी-ठिठौली से गुलजार रहने वाला राजकीय महिला पॉलीटेक्निक के छात्रावास का ब्लॉक सी बृहस्पतिवार को एकदम सन्नाटे में था। 35 छात्राओं वाले ब्लॉक में मुश्किल से दस-12 हीं छात्राएं थीं। क्लास में उसके साथ बैठने वाली छात्रा आरती और खुशी बदहवास हैं। किसी के पूछने पर भी वह बोल नहीं पा रही हैं। उनकी आंखों से सिर्फ आंसू बह रहे हैं। काजोल अब उनके साथ नहीं है, इस बात पर वह विश्वास नहीं कर पा रही हैं।

अन्य छात्राएं व शिक्षिकाएं इस विपरीत परिस्थिति से निकलने के लिए उनका हौसला बढ़ा रही हैं। छात्रावास की हैड गर्ल्स व कंप्यूटर साइंस तृतीय वर्ष की छात्रा सोलांकी ने बताया कि कमरा नंबर नौ की छात्राओं ने दरवाजा खटखटाया था। उसके फोन पर कॉल की, लेकिन उसने रिसीव नहीं की।

जवाब नहीं मिलने पर दरवाजे के एक छेद से झांककर देखा तो काजोल फंदे से लटकी हुई थी। इसके बावजूद हम सभी को यह उम्मीद थी कि काजोल को कुछ नहीं होगा। वह बच जाएगी, लेकिन दरवाजा तोड़ने पर जब सब अंदर गए तो देखा कि कालोज के साथ हमारी उम्मीदें भी मर गईं।

न खाना खाया और न रात भर सोईं
सोलांकी ने बताया कि जो छात्राएं खाना खाने से रह गई थीं, उन्होंने बाद में न तो खाना खाया और न ही पूरी रात कोई छात्रा सो पाई। छात्रा रिया सक्सेना ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह कक्षाओं का संचालन किया गया था, लेकिन बाद में छुट्टी कर दी गई। क्योंकि घटना के बाद से सभी छात्राएं डरी हुई हैं। निशिका मिश्रा ने बताया कि दिन में खाना खाया है, लेकिन किसी को अच्छा नहीं लग रहा है। इस हादसे से उबरने में वक्त लगेगा।

 

30 छात्राओं ने छोड़ा हॉस्टल
प्रधानाचार्य धीरेंद्र कुमार यादव का कहना है कि संस्था में 450 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें से छात्रावास में 156 छात्राएं रहती हैं। घटना के बाद से अन्य छात्राएं डरी हुई हैं। अभिभावकों को भी उनकी चिंता हो रही है। अभिभावक छात्राओं को वापस घर आने की कह रहे हैं। इसलिए बृहस्पतिवार को छात्रावास की 30 छात्राएं अपने घर लौट गई हैं। ब्लॉक सी की कुछ छात्राओं को अभी रोका गया है, क्योंकि मामले की जांच चल रही है। पुलिस अधिकारी छात्राओं के बयान लेने भी आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद यदि कोई छात्रा घर जाना चाहेगी तो उसे भेज दिया जाएगा।

चार भाइयों की इकलौती बहन थी काजोल
बेटी की मौत की खबर मिलने पर पिता हलकुट्टा, मां सुनीता अपने रिश्तेदार के साथ बृहस्पतिवार रात मुरादाबाद पहुंच गए और उन्होंने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर थाना प्रभारी आरपी शर्मा से मिलकर पूरे मामले की जानकारी ली। इसके अलावा कॉलेज जाकर भी पूछताछ की। पिता ने बताया कि काजोल के चार बड़े भाई हरि मिलन, रघुवीर, अजय और सुरेंद्र हैं। एक भाई फरीदाबाद में सिलाई का काम करता है।
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शेष भाई गांव में ही रहकर खेतीबाड़ी करते हैं। काजोल की मौत के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता हलकुट्टा ने कहा कि उनकी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पिता का कहना है कि चारों भाई छोटी बहन को बड़ी उम्मीद के पढ़ा रहे थे। भाइयों का कहना है कि उनका सपना था कि हमारी बहन पढ़ लिखकर अफसर बनेगी तो हमारा नाम रोशन होगा।
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