मंडल के जिलों को भाजपा मुस्लिम बेल्ट मानती है। रामपुर, संभल, अमरोहा और मुरादाबाद की 19 सीटों पर बड़ी जीत की उम्मीद भी भाजपा नहीं करती। बड़ी सफलता लहर के दौरान ही यहां मिलती रही है।
1991 और 1993 में अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की लहर के दौरान ही यहां की 12 में से नौ सीटें भाजपा को मिली थीं। बरसों बाद यहां मुरादाबाद शहर समेत नौ सीटेें भाजपा ने जीती हैं। हालांकि जहां पूरे प्रदेश में मोदी लहर थी ऐसे में मुस्लिम समाज ने साइकिल भी खूब दौड़ाई।
19 में से 10 सीटें सपा के खाते में गईं। 2012 में सपा के पास 16 विधायक थे, लेकिन इस बार 10 सीटों पर ही सिमट गए। भाजपा ने यूपी के विधानसभा चुनाव में किसी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया।
इसके पीछे कारण माना गया कि शायद ध्रुवीकरण के लिए ऐसा किया गया हो, लेकिन पहले दो चरणों के चुनाव में इस तरह की आक्रामकता चुनावी नारों तथा नेताओं के बयानों में नहीं दिखी। इन दोनों चरणों के सीटों पर मुस्लिम निर्णायक की भूमिका में भी हैं।
तीसरे चरण से भाजपा नेताओं के बयान आक्रामक हुए। सातवां चरण आने तक पूरे प्रदेश में ध्रुवीकरण जैसा माहौल दिखाई देने लगा। हालात यहां तक पहुंचे कि जब काशी के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोले शंकर के जयकारे लगाए तो उन पर भी कड़ी टिप्पणियां की गईं।
इस स्थिति तक भी भाजपा नेताओं को इतने अच्छे परिणाम की उम्मीद नहीं थी, खासकर पहले दो चरणों की सीटों पर तो बिल्कुल नहीं। रामपुर, संभल, अमरोहा और मुरादाबाद में नौ सीटों पर भाजपा की जीत से मुस्लिम समर्थन के भी संकेत मिल रहे हैं।
यदि ऐसा हुआ है तो यह भाजपा के प्रति मुस्लिम समाज में बड़ा परिवर्तन ही माना जा सकता है। हालांकि दस सीटों पर सपा प्रत्याशी जीते हैं। अगर प्रदेश की स्थिति देखें तो सपा ने 47 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां दस सीटें मिलना महत्वपूर्ण है। इससे मुस्लिम बेल्ट पर सपा के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।