पत्रकारों से बातचीत में सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि मथुरा के मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह फैसला स्वागत करने योग्य है। कुछ लोग देश की सियासत में धर्मों का सहारा लेकर अपनी मंजिल तय करना चाहते हैं। वे बेरोजगारी और महंगाई बात करना नहीं चाहते हैं। भाजपा धार्मिक भावनाएं भड़काकर जनता का वोट हासिल करना चाहती है। कुछ लोग देश की 3000 मस्जिदों पर मंदिर होने का दावा करते हैं। इस तरह से दोनों कौमों के बीच नफरत पैदा होगी। आरोप लगाया कि इस समय एक कम्युनिटी को दबाया जा रहा है। जब मस्जिदें बनाई गई थीं, तब बादशाहों का जमाना था। उस समय संविधान नहीं था। बादशाह की जुबान ही संविधान होती थी। मंदिर मस्जिद के नाम पर देश को 500 साल पीछे ढकेलना देश के हित में नहीं है। देश हित में सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करना है। श्रीराम पर देश के करोड़ों लोगों की आस्था है, जो उनको भगवान को मानते हैं। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा में शंकराचार्य नहीं आ रहे हैं। इंडिया गठबंधन में राहुल गांधी ब्राह्मण हैं। शरद पवार और नीतिश कुमार जैसे नेता भी हिंदू हैं। हो सकता है कि गठबंधन के नेता 22 जनवरी के बाद मत्था टेकने जाएंगे। श्रीराम को मानने वाले गठबंधन के नेता इस मामले पर राजनीतिकरण करना नहीं चाहते हैं।
मायावती पर कमेंट नहीं
सांसद ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती देश में दलितों की बड़ी नेता है। उनके अपने फैसले हैं। वो पहले से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी हैं। इस मामले में वह कमेंट नहीं कर सकते हैं लेकिन भाजपा को हराने के लिए जो दल आना चाहते हैं। उनको गठबंधन के साथ आना चाहिए। अब चुनाव में जनता फैसला करेगी।