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Moradabad News: छोटे-छोटे मजरों में बड़ी-बड़ी दुश्वारियां, देखना तो दूर सुनने वाला भी कोई नहीं

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मुरादाबाद। ग्राम पंचायतें ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र की सबसे छोटी इकाई कहे जाने वाले मजरे तक बड़ी-बड़ी समस्याओं में घिरे हैं। इनमें बसे लोगों से दुरुस्त रास्ते, साफ पानी, नाले-नाली जैसी बुनियादी जरूरतें कोसों दूर हैं। कारण बहुत साफ है कि मंडल और जिला स्तर के अफसर मजरों को सिर्फ समीक्षा बैठकों में पेश होने वाले कागजों पर ही देखते हैं तो ग्राम पंचायत स्तरीय अधिकारी भी इस ओर नहीं झांकते। जनप्रतिनिधियों को भी इनकी याद चुनाव के समय आती है। यही वजह है कि स्कूल, अस्पताल, खेल के मैदान जैसी एक पायदान आगे की सुविधाएं तो इनके लिए सपना हैं। जीवन जीने के लिए जरूरी सफाई, सड़क, बिजली-पानी तक मयस्सर नहीं हैं। काम और सुधार की मांग बार-बार अनसुनी हो जाने से अब मजरों में रहने वाले इन समस्याओं से समझौते को अपना नसीब मान बैठे हैं।
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निर्मलपुर मजरे में पाइप लाइन बिछी, टैंक का काम अधूरा

ठाकुरद्वारा। ग्राम पंचायत गोपीवाला का मजरा निर्मलपुर विकास से अछूता है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत बन रहा ओवरहेड टैंक का काम अधूरा है। इस बीच पाइप लाइन बिछा दी गई। लिहाजा साफ पानी मिला नहीं। टैंक बनने तक पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने का खतरा और हो गया है। टैंक की खाली पड़ी जमीन पर उपले पाथे जाने लगे हैं। मजरे के ज्यादातर रास्ते क्षतिग्रस्त हैं। जूनियर हाई स्कूल का भवन खंडहर हो चुका है। आंगनबाड़ी केंद्र अक्सर बंद रहता है। गांव के अर्जुन सिंह, बिसारत अली, फिरासत अली, महिपाल सिंह, चमन प्रकाश आदि ने बताया कि ग्राम प्रधान ने उनके क्षेत्र में कोई काम नहीं कराया है। विधायक-सांसद आते नहीं। ग्राम प्रधान अंसरिन जहां ने बताया कि उन्होंने कई रास्ते बनवाए हैं।

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लाडलाबाद में कीचड़ भरे कच्चे रास्ते से स्कूल जाते हैं बच्चे

कांठ। छजलैट ब्लॉक की ग्राम पंचायत खतापुर से दो किलोमीटर दूर 35 घरों व 400 की आबादी वाले मजरे लाडलाबाद में सरकारी स्कूल को जाने वाला 100 मीटर का रास्ता कच्चा है। पानी की निकासी न होने से रास्ते में और स्कूल के सामने कीचड़ से भी बच्चों का सामना होता है।
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प्रधानाध्यापक सुखवीर सिंह ने बताया कि पक्के रास्ते की मांग करने पर भी कुछ नहीं हुआ। सतवीर सिंह, जयवीर सिंह व श्योराज सिंह ने कहा कि बरसात में बच्चे और शिक्षक कीचड़ व गंदे पानी से ही निकलते हैं। यहां के बाशिंदों ने बताया कि गांव में सार्वजनिक शौचालय, आरआरसी सेंटर, एएनएम सेंटर व आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं है। पाइपलाइन से रास्ते खराब कर दिए मगर सुधारे नहीं। महावीर सिंह ने कहा कि नियमित सफाई नहीं होती। राशन के लिए भी किलोमीटरों दौड़ना पड़ता है। ग्राम पंचायत सचिव नेमपाल सिंह का कहना है कि स्कूल का रास्ता कार्य योजना में है, इसे जल्द बनवाया जाएगा।

मजरा खानपुर में डेढ़ साल से टूटी सड़कें हैं। यहां रहने वाले छत्रपाल,नरेश कुमार,मुन्नी देवी और सचिन ने बताया कि मजरे में 20 वर्ष पहले सड़कें बनी थीं। अब कुछ ही सड़कों का निर्माण हो सका है। घरों में पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई तो सड़कें खोदकर छोड़ दीं। निकलना मुश्किल हो रहा है। यहां तो चुनाव के समय ही नेताओं के दर्शन होते हैं।

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मानकपुर में नाला नहीं, सड़क पर गंदा पानी

कुंदरकी। ग्राम पंचायत भैसोड़ के मजरा मानकपुर में एक हजार से अधिक की आबादी है। नाला न होने से मुख्य रास्ते पर जलभराव है। बारिश होने पर हालात ज्यादा खराब हो जाते हैं। यहां के निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि तालाब तक नाला नहीं बनाया। हर घर जल भी नहीं पहुंच रहा। आठ इंडिया मार्का हैंडपंपों में से चार खराब हैं। पीएम आवास योजना में चयनित पांच लाभार्थी घर का इंतजार कर रहे हैं। भैसोड़ के प्रधान प्रेमपाल सैनी ने बताया कि नाला निर्माण के लिए प्रस्ताव दिया है।

वहीं, ग्राम पंचायत खजरा के मजरा हाथीपुर चंदू की आबादी लगभग एक हजार है। खजरा से हाथीपुर चंदू जाने वाला रास्ता कच्चा है। बारिश में जलभराव हो जाता है। जगवीर सिंह ने बताया कि आबादी के बीच ही कूड़ा डाला जाता है। ओवरहेड टैंक से घरों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई। सड़कें और खोदकर छोड़ दीं। सात में से चार हैडपंप खराब हैं।

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टंकी बनी नहीं, पाइप लाइन बिछा दी, साफ पानी को तरस रहा भाड़ला
पाकबड़ा । ग्राम पंचायत भाड़ली के मजरा भाड़ला में घरों में पाइप लाइन की फिटिंग हो गई। जिस टंकी से सप्लाई होनी थी वह चार साल बाद भी अस्तित्व ही नहीं आई। लोग कहते हैं कि यहां सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई से जुटने वाले सरकारी धन की बर्बादी दिख रही है। पाइप लाइन बिछाने के नाम पर चार साल पहले जो सड़कें खोदी गई थीं, उन्हें आज तक ठीक नहीं किया गया। जल निकासी पूरी तरह ठप है। जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा है। मित्रपाल सिंह और भूप सिंह ने कहा कि हम अफसरों की चौखट पर गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। राजवीर सिंह, अरविंद सिंह और दीपक कुमार का कहना है कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बिना मुख्य टैंक के निर्माण के पाइप लाइन का भुगतान होने पर भी सवाल उठ रहा है।

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दुपेडा में मुख्य सड़क उखड़ी, कूड़े के ढेर लगे

मूंढापांडे। सात सौ की आबादी वाले मजरा दुपेडा की मुख्य सड़क उखड़ी है। पास में कूड़े के ढेर हैं। नाली निर्माण न होने के कारण खडंजे पर गंदा पानी फैला रहता है। शौचालय जर्जर हालत होने के कारण उपयोग में नहीं आ रहा है। जल जीवन मिशन के तहत गांव में टंकी बनी लेकिन पानी की सप्लाई नहीं हुई। खेमपाल सिंह का कहना है कि गांव में प्रधानमंत्री आवास की सुविधा नहीं मिली। कोई अधिकारी उनका हाल जानने तक नहीं पहुंचा।

ग्राम पंचायत भीतखेडा के मजरे में दो हजार की आबादी को सड़क तक नसीब नहीं हुई। परम सिंह ने बताया कि आम रास्ता कच्चा होने से बारिश में पानी भर जाता है। डंबर सिंह ने इंडिया मार्का हैंडपंप की चबूतरी टूटी होने की समस्या बताई। बृजलाल कहते हैं कि शौचालय तक का निर्माण नही कराया गया है।
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