सोत नदी पर बने मकान (फाइल फोटो)
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वातावरण में बड़ी तेजी के साथ बदलाव हो रहा है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। जल स्रोत सूख रहे हैं। हमारे संभल जनपद में चालीस पचास वर्ष पहले सोत नदी बहा करती थी। लेकिन यह नदी धीरे-धीरे यह नदी मिट गई। नदी अब सिर्फ कागजों में रह गई। लेकिन हमारे अधिकारियों ने इस नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। जनता और जनप्रतिनिधियों से सहयोग लेकर नदी को पुनर्जीवित करने के काम की औपचारिक शुरूआत शनिवार को कर दी है। अब हर रोज कुछ न कुछ काम होगा और आने वाले दिनों में नदी बहेगी। नदी दोनों तरफ खाली जमीन पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। जो पर्यावरण को सुधारेंगे और आम लोगों को छाया देंगे। वहीं भूल जलस्तर भी बढ़ेगा।
अविनाश कृष्ण सिंह, जिलाधिकारी। संभल।
नजर आएगी हरियाली ही हरियाली
अमर उजाला ने कहां गए पर्यावरण पर आए संकट को शृंखलाबद्ध तरीके जनता के बीच रखा। कहां गए जल स्रोत शीर्षक से लगातार खबरें प्रकाशित की गईं। इसका संज्ञान जिला प्रशासन ने लिया। अब मनरेगा के तहत नदी की खुदाई होगी। वन विभाग खाली जमीन पर पौधे लगाएगा। अमर उजाला की पहल पर जिला प्रशासन ने अपना काम जारी रखा तो आने वाले वर्षों में जनपद संभल का नाम उन जनपदों में शामिल हो जाएगा जहां पर हरियाली ही हरियाली नजर आएगी। साथ ही सोत नदी भी पुनर्जीवित हो जाएगी।