मुरादाबाद। सभी कीट, फफूंदी और वायरस खराब नहीं होते, इनमें कुछ मित्र भी होते हैं जो कृषि के दुश्मन कीटों को नष्ट कर फसलों की सुरक्षा करते हैं। इससे पैदावार बढ़ती है। कुछ ऐसे ही मित्र कीटों, फफूंदी व वायरस का उत्पादन और संरक्षण मुरादाबाद की आईपीएम प्रयोगशाला में किया जा रहा है। यह कीट रात के अंधेरे में खेतों में दुश्मन कीटों से लड़कर उन्हें खत्म करके किसानों की फसलों की सुरक्षा करते हैं और करीब 20 प्रतिशत तक ही पैदावार बढ़ाते हैं।
प्रयोगशाला में हर सीजन में लगभग 1000 से अधिक ट्राइकोग्रामा कार्ड, 25000 किलो ट्राइकोडर्मा, 15000 किलो ब्यूबेरिया बेसियाना और लाखों की संख्या में एनपीवी वायरस पैदा करके मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बिजनौर और अमरोहा जिले के साथ साथ बुलंदशहर और हापुड़ जिले के किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें ट्राइकोग्रामा नाम से ततैया कुल के एक ऐसे अंड परजीवी को पैदा किया जा रहा है जो लेपिडोप्टेरा कुल (उड़ने वाले कीट पतंगे) के करीब 200 नुकसान पहुंचाने वाले कीटों के अंडों को जैविक विधि से नष्ट करने में सक्षम हैं। यह सिर्फ आठ से 12 दिन में अपना कार्य पूरा कर देता है।
मुरादाबाद की इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (एकीकृतनाशी जीव प्रबंधन) प्रयोगशाला, प्रदेश की नौ आईपीएम प्रयोगशालाओं में से एक है। जहां मित्र कीट, वायरस और फफूंदी पैदा होती है। उपनिदेशक व सहायक निदेशक (कृषि रक्षा) की देखरेख में तकनीकि सहायक सुमन प्रकाश, अमृतपाल और सोनू की टीम प्रयोगशाला में कीटों, वायरस, फफूंदी (कवक) आदि को पैदा करके किसानों तक पहुंचा रही है। सेवानिवृत्त हो चुकी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शैलेष त्यागी ने बताया कि प्रयोगशाला में ट्राइकोग्रामा (परजीवी कीट), ट्राइकोडर्मा (फफूंदी), ब्यूबेरिया बेसियाना (फफूंदी जनित), न्यूक्लियर पाली हैड्रासिस वायरस (एनपीवी) का उत्पादन करती है।
ट्राइकोग्रामा परजीवी है, यह गन्ने से लेकर बैंगन तक सभी तरह के छिद्रक (बोरर) कीटों को नष्ट करती है। यह करीब 200 प्रकार के हानिकारक कीटों के अंडो को खाकर जीवित रहता है, इसकी लंबाई 0.4 से 0.7 मिमी तक होती है। इसकी मादा ट्राइकोग्रामा ततैया अपने अंडो को फसल की पत्तियों पर मौजूद हानि पहुंचाने वाले कीटों के अंडो के बीच दे देती है, वहीं पर इसके अंडों की वृद्धि होती है, इसी बीच इसका लार्वा हानिकारक कीटों के अंडो के भ्रूण को खाकर अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इसकी पूर्ति कार्ड के रूप में होती है, एक कार्ड पर 20 हजार अंडे होते हैं, धान, गन्ना, सूरजमुखी, कपास, दलहन, फलों व सब्जियों के नुकसान पहुंचाने वाले तना छेदक, फसल छेदक, पत्ती लपेटक आदि कीटों को जैविक विधि से नष्ट करता है। इससे खेतों में हानिकारक कीटनाशक लगाने की आवश्यकता नहीं होती है।
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एनपीवी है मित्र वायरस
- एनवीपी हरी सूंडी (स्पेडोप्टेरा लिटूरा) पर आधारित जैविक कीटनाशक है जो तरल रूप में उपलब्ध है। इसमें वायरस कण होते हैं, जिन्हें सूड़ी द्वारा खाने पर या संपर्क में आने पर सूंडियों का शरीर दो से चार दिन में भीतर से फूल जाता है, सड़कर सूंड़ी खत्म हो जाती है। मरी हुई सूंड़ियां पत्तियों, टहनियों, फलियों आदि पर उलटी लटकी हुई देखी जा सकती हैं। यह खासकर फूल गोभी, टमाटर, मिर्च, चना, अरहर, तंबाकू, कपास, मटर, भिंडी व फूलों को सूंड़ियों से बचाने का कारगर जैविक तरीका है।
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- आईपीएम प्रयोगशाला का कार्य जैविक तरीके से फसलों की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, यहां तैयार होने वाली मित्र कीट, फफूंदी व वायरस आदि सभी जैविक और प्राकृतिक तरीके से नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खत्म कर देते हैं। यहां से मुरादाबाद मंडल के साथ साथ अन्य जिलों को डिमांड के आधार पर उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाती है।
डॉ.रविकांत सिंह, उपनिदेशक (कृषि) मुरादाबाद।