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इंटर कालेजों के बंद होने से फंस गए बीएड के प्रैक्टिकल

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मुरादाबाद। केंद्र सरकार के निर्देशों की वजह से शिक्षण संस्थाएं 30 सितंबर तक बंद हैं। इंटर कालेज बंद होने की वजह से बीएड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं फंस गई हैं। प्राचार्य समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन वहां से निर्देश नहीं मिलने की वजह से शिक्षक असमंजस में हैं। प्राचार्यों का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में शिक्षण पद्यति बदल गई है। इसलिए हम प्रयोगात्मक परीक्षाओं के नियमों को बदलने का सुझाव दे रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता एक सितंबर से परीक्षा शुरू कराने की है।
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विश्वविद्यालय की बीएड की परीक्षाएं 11 सितंबर से 20 सितंबर तक होंगी, जबकि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए 30 सितंबर अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। प्राचार्य दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा ने बताया कि बीएड की 50 सीटें हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाओं में बीएड के विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य करना होता है, लेकिन इंटर कालेज बंद होने की वजह से विद्यार्थी पढ़ाई नहीं करा पा रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल में इंटर कालेज की आनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही हैं तो मैंने आनलाइन प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए व्हाइट बोर्ड और प्वाइंटर आदि बनाने का नियम होने की वजह से यह अभी संभव नहीं हो पा रहा है। जब शिक्षण प्रक्रिया बदल रही है तो प्रयोगात्मक परीक्षाओं के नियम भी बदलने चाहिए, ताकि समय पर परिणाम जारी हो सके। लेकिन अभी विश्वविद्यालय स्पष्ट निर्देश नहीं दे पा रहा है।
हिंदू कालेज के शिक्षा के विभाग अध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि बीएड में 50 और एमएड में 20 विद्यार्थी हैं। विश्वविद्यालय ने प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए जो नोटिस भेजा है, उसमें वाह्य परीक्षकों के नाम भी नहीं हैं। मैं विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडी समिति का सदस्य हूं। दूसरे विश्वविद्यालय के शिक्षकों को परीक्षक बनाने के बजाय अपने विवि के सेवानिवृत्त शिक्षकों को वाह्य परीक्षक बनाने का सुझाव दिया है, ताकि वह आसानी से उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा इंटर कालेज बंद होने की वजह से मैंने सूक्ष्म शिक्षण (माइक्रो टीचिंग) या एक-दूसरे से सीखने (पीर ग्रुप टीचिंग) के माध्यम से प्रयोगात्मक परीक्षा कराने का सुझाव दिया है। इस माध्यम में इंटर कालेज के बजाय बीएड के विद्यार्थी इकट्ठे होकर कक्षा में बैठते हैं और उन्हीं में से जिसका नंबर आए, वह छात्र शिक्षक बनकर अन्य विद्यार्थियों को पढ़ाता है। इससे शिक्षण प्रक्रिया भी हो जाएगी और समय पर प्रयोगात्मक परीक्षाएं भी करा सकेंगे।
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वर्जन...
बीएड की प्रयोगात्मक परीक्षाओं में इंटर कालेज बंद होने की समस्या आएगी, लेकिन अभी हमारा पूरा ध्यान एक सितंबर से शुरू होने वाली अंतिम वर्ष की शेष परीक्षाओं पर है। इसके बाद बैठक कर कुछ निर्णय लिया जाएगा।
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संजीव सिंह, परीक्षा नियंत्रक, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय।
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