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तीसरी लहर से अभिभावकों को डरने की नहीं सतर्क रहने की है जरूरत

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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण के पिछले 10 दिनों में नए केसों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों ने तीसरी लहर आने की आशंका व्यक्त की है। इसमें विशेषज्ञों ने 15 साल तक के बच्चों के लिए खतरा बताया है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि इससे घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। अभी हमारे पास तैयारी के लिए समय है।
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मुरादाबाद में भी तीसरी लहर से बच्चों को बचाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है, लेकिन मुरादाबाद में मार्च 2020 से अब तक के रिकॉर्ड को देखें तो नवजात से 20 वर्ष तक के अब तक करीब पांच हजार बच्चे कोरोना संक्रमित हुए हैं, जिसमें से सिर्फ दो बच्चों की मौत हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि अभिभावक बच्चों की दिनचर्या, खान-पान पर विशेष ध्यान दें और सकारात्मक विचार रखें। एक मई से 20 मई 2021 तक लगभग 410 बच्चों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस दौरान सिर्फ दो बालिकाओं की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई है। 13 अप्रैल को डबल फाटक निवासी 12 वर्षीय बालिका ने कोरोना संक्रमण की वजह से दम तोड़ दिया था और 13 सितंबर 2020 को डिडोरा निवासी 17 वर्षीय युवती की मौत हुई थी। चिकित्सकों का कहना है कि 95 फ़ीसदी बच्चों ने होम आइसोलेशन में रहकर ही कोरोना संक्रमण को मात दी है और उनकी रिकवरी बड़ों की तुलना में बहुत तेजी से हुई है।
रिकवरी तेज पोस्ट कोविड दिक्कतें कम
चिकित्सकों का कहना है कि दूसरी लहर में संक्रमित हुए 410 बच्चों में रिकवरी की रफ्तार भी काफी तेज है। सभी बच्चे 1 सप्ताह से 10 दिन में स्वस्थ हो रहे हैं। इसके अलावा बच्चों में पोस्ट कोविड दिक्कत नहीं आ रही है।
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बच्चों की रिकवरी का प्रमुख कारण यह है कि उनका मेटाबॉलिक सिस्टम अच्छा होता है और उनके अंदरूनी अंग मजबूत होते हैं। संक्रमण से जो नुकसान होता है उनकी रिकवरी बड़ों की तुलना में तेजी से होती है। बच्चों में संक्रमण था इसके बावजूद मेटाबॉलिज्म अच्छा होने की वजह से बहुत जल्दी स्वस्थ हो गए हैं।
- डॉ कल्पना सिंह, एसआईसी मंडलीय चिकित्सालय
अभी तीसरी लहर के आने और उसका बच्चों पर प्रभाव होने की सिर्फ आशंका व्यक्त की जा रही है। इसमें कुछ भी पुष्ट नहीं है। सरकार ने 2 से 18 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसका ट्रायल होने वाला है। उम्मीद की जा रही है कि जुलाई तक बच्चों की भी वैक्सीन आ जाएगी। इसलिए अभिभावकों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। वह अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। उन्हें हरी सब्जियां, सूखे मेवा और प्रोटीनयुक्त पौष्टिक खाना खिलाए। बच्चों को घर पर ही आसन-प्राणायाम कराएं।
- डॉ. रवि गंगल, बाल रोग विशेषज्ञ
शुरू से ही संक्रमण ने बच्चों को ज्यादा प्रभावित नहीं किया है। सरकार ने समय रहते स्कूलों को बंद कर दिया था। बच्चे जो भी संक्रमित हुए हैं वह बड़ों के संपर्क में आने की वजह से संक्रमित हुए हैं। जिन दो बच्चों की मृत्यु हुई है हो सकता है कि वह पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। बच्चों के शीघ्र स्वस्थ होने का सबसे बड़ा कारण है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और वह तनाव नहीं लेते हैं।
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- डॉ. प्रवीण शाह, इंचार्ज कोविड एल टू अस्पताल
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