धड़ाम की आवाज... फिर मची चीखपुकार
जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त मेहमानों को नाश्ता कराने की तैयारी चल रही थी। जिला अस्पताल में भर्ती हादसे में घायल सुभाष ने बताया कि मैं, विकास, सुमेर और अरशद के साथ खौलती हुई मूंग की दाल लेकर लिफ्ट से नीचे आ रहा था। तभी अचानक लिफ्ट तेजी से नीचे चली और धड़ाम की तेज आवाज हुई। इसके बाद हम सभी बेहोश हो गए। होश में आने पर डायल-112 पर कॉल कर पुलिस से मदद की गुहार लगाई, लेकिन तब तक पुलिस और एंबुलेंस आ चुकी थी।
चार मंजिला इब्राहिम बैंक्वेट हॉल में लगी लिफ्ट की देखरेख में लापरवाही का नतीजा यह रहा कि चार मजदूरों की जान पर बन आई। गनीमत रही कि यह हादसा दावत शुरू होने से पहले हुआ अन्यथा यहां आने वाले मेहमान भी इसी लिफ्ट से आने जाने वाले थे।
घटना के बाद पुलिस और बैंक्वेट हॉल के लोग घायलों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाए, जहां प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें निजी अस्पताल लेकर चले गए। मजदूरों को किस अस्पताल में ले गए हैं, इसकी जानकारी तक उन लोगों ने जिला अस्पताल प्रशासन को नहीं दी।
30 किलो खौलती मूंग दाल का भगौना गिरने से झुलसे मजदूर
बैंक्वेट हॉल संचालक ने चारों घायलों को जिला अस्पताल से रेफर कराकर तीन मजदूरों को हरथला में निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया है, जबकि चौथे मजदूर अरशद को कहां भर्ती कराया, इसकी खबर उसके घायल साथी सुभाष, विकास व सुमेर तक को नहीं है।
घायलों ने बताया कि बैंक्वेट हॉल की चौथी मंजिल पर वलीमा की दावत का खाना होना था और तीसरी मंजिल के हॉल में डांस आदि का कार्यक्रम था। खाना-नाश्ता चौथी मंजिल पर ही बन रहा था। नाश्ता तैयार होने के बाद उसे वह लोग तीसरी मंजिल के हॉल में लिफ्ट से ही ला रहे थे।
नाश्ते के साथ में करीब 30 किग्रा खौलती मूंग की दाल भी थी, जो घटना के दौरान भगौने से उछल कर बाहर आ गई और उससे विकास व सुभाष के हाथ-पैर व चेहरे झुलसे भी हैं।
एक का पैर तो दूसरे की कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर
जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. पवन कुमार ने बताया कि श्रमिक सुभाष व विकास को हल्की चोटें हैं, लेकिन इनके अन्य दो साथी सुमेर व अरशद की हालत गंभीर है। इन दोनों का इमरजेंसी एक्स-रे भी कराया तो उसमें एक मजदूर के पैर और दूसरे के कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया।
बाद में घायलों को परिजन निजी अस्पताल लेकर चले गए। किस अस्पताल में ले गए हैं, इसकी जानकारी उन्होंने अस्पताल में नहीं दी।
चार साल पहले गाजियाबाद से मंगाई थी लिफ्ट
बैंक्वेट हॉल के मालिक हाजी असलम ने बताया कि वह बाहर हैं, उन्हें घटना के बारे में जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि चार साल पहले गाजियाबाद से लिफ्ट मंगाकर अपनी फैक्टरी में लगवाई थी। करीब दो-तीन महीने पहले ही उसे फैक्टरी से बैंक्वेट हाॅल में शिफ्ट करवाया था।
इस लिफ्ट की क्षमता कितने वजन की है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इससे पहले लिफ्ट से कभी भी कोई घटना नहीं हुई है और न ही लिफ्ट में कोई खराबी आई।
हर तीन महीने पर लिफ्ट की होनी चाहिए जांच
स्वास्थ्य विभाग में तैनात सहायक अभियंता विद्युत मांगेराम के मुताबिक हैं कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की गाइड लाइन में स्पष्ट है कि प्रत्येक तीन महीने पर लिफ्ट की जांच करानी चाहिए। लिफ्ट संचालन के लिए भी नियमित रूप से ऑपरेटर रखने के निर्देश हैं। यह नियम सरकारी और निजी क्षेत्र में लगी लिफ्ट के लिए हैं।
दोपहर में भी खराब हुई थी लिफ्ट, फंस गए थे मजदूर
निजी अस्पताल में भर्ती मजदूरों के मुताबिक घटना से पहले दोपहर में भी लिफ्ट खराब हुई थी। नीचे उतरते समय मजदूर लिफ्ट में फंस गए थे। फिर बैंक्वेट हॉल वालों ने किसी तरह से दोबारा लिफ्ट चालू कर ली थी। एक बार ऐसा होने वह डरे भी थे तो लिफ्ट से आने जाने को तैयार नहीं थे। लेकिन बैंक्वेट हॉल के मैनेजर ने काम की जल्दबाजी में मजदूरों को लिफ्ट से ही आने-जाने को कहा।
गनीमत रही दावत से पहले ही हुआ हादसा
गनीमत रही कि हादसा उस समय हुआ जब वलीमा की दावत की तैयारी चल रही थी। नहीं तो दावत के समय कार्यक्रम व खाना खाने के लिए आने वाले मेहमान लिफ्ट का ही प्रयोग करते और उस समय यदि तार टूटता और लिफ्ट नीचे गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था