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मायके की माटी में सुपुर्देखाक हुईं फरहाना बाजी

Sun, 15 Nov 2015 06:19 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
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महिलाओं को अपने मायके की माटी से प्यार होना स्वाभाविक है। मुरादाबाद की फरहाना को भी था। शादी के बाद विदा होकर पिया के मुल्क बांग्लादेश चली गई थीं। वहां की नागरिकता भी मिल गई थी। शौहर के इंतकाल के बाद वहां का माहौल बेगाना सा लगा। 15 साल पहले मायके मुरादाबाद लौट आईं।
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लांग टर्म वीजा पर मुरादाबाद में रह रही थीं। घर की बुजुर्ग थीं। 70 साल की फरहाना को घर-मोहल्ले में सभी बाजी (बड़ी बहन) कहते थे। उनकी अंतिम इच्छा अपने मायके के ही मुल्क में सुपुर्द-ए-खाक की थी। कुदरत ने उनकी आरजू पूरी कर दी। शनिवार दोपहर जनाजे की नमाज के बाद उन्हें सूपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।



मुगलपुरा के कानून गोयान निवासी व पूर्व पार्षद मो. हससैन की बहन फरहाना कमाल की शादी 1977 में बांग्लादेश के ढाका निवासी कारोबारी कमाल अख्तर के साथ हुई थी। फरहाना को वहां की नागरिकता मिल गई थी। हसनैन के मुताबिक वर्ष 2000 में उनके  बहनोई कमाल अख्तर का इंतकाल हो गया था।
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बहन को बच्चा भी नहीं हुआ था। वह अकेली रह गई थीं। फरहाना की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। इसके अलावा आखिरी आरजू थी कि वह मुरादाबाद में ही अपनों के बीच अंतिम सांस लें। तेरह साल पहले भाइयों ने फरहाना को मुरादाबाद बुला लिया था।


हसनैन ने बताया कि शनिवार सुबह दूसरे भाई निर्यातक मसूद के घर लाजपतनगर में फरहाना ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर मिलने पर हसनैन, उनके भाई मो. कमर, जावेद, भी पहुंच गए। इसके अलावा रिश्तेदार भी जुट गए। हसनैन ने बताया कि मेहंदी बाग में दोपहर नमाज के बाद फहाना को सूपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।



हज का पाक सफर करना चाहती थीं फरहाना
भाई मोहम्मद हसनैन ने बताया कि फरहाना हज का पाक सफ र करना चाहती थीं। लेकिन बांग्लादेश की नागरिकता होने के बाद उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही थी। शासन से अनुमति मांगी गई थी लेकिन मिल नहीं पाई थी।
एलआईयू की टीम भी लाजपत नगर पहुंची l बांग्लादेशी महिला की मौत की खबर मिलने पर पुलिस और एलआईयू की मौके पर पहुंची। एलआईयू की टीम ने लोगों से पूछताछ की और वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की।
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