मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण का प्रतिकूल प्रभाव स्वास्थ्य के अलावा सबसे अधिक शिक्षा पर पड़ा है। दो वर्ष तक ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करने वाले ज्यादातर बच्चों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। असेंबली में प्रार्थना भूलने के अलावा लगातार क्लास में बैठने में बच्चे असहज हो रहे हैं। प्रधानाचार्यों का कहना है कि बच्चों को स्कूल की दिनचर्या में ढलने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा। इसके लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार से मुरादाबाद में नर्सरी से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुल गए हैं। कुछ स्कूलों ने अभी भी ऑफलाइन माध्यम से पढ़ाई के अलावा ऑनलाइन माध्यम को भी संचालित रखा है, जबकि ज्यादातर विद्यालयों में अब ऑनलाइन पढ़ाई को बंद कर दिया गया है। ऐसे में जब बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, तो उनके व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है। पीएमएस के प्रिंसिपल मैथ्यू पी एलिनचेरिल का कहना है कि स्कूल आने के लिए छोटे बच्चों में उत्साह बहुत अधिक है। ज्यादातर बच्चे स्कूल आकर पढ़ना चाहते हैं। कक्षा तीन तक के बच्चों में प्रेयर के अलावा उपस्थिति या अनुपस्थिति कैसे बोलना है, इसे भूल गए हैं। हर पीरियड बाद उनके ब्रेक की संख्या बढ़ गई है। लॉकडाउन और लगातार दो वर्ष तक ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से इस तरह की स्थितियां उत्पन्न हुई हैं। हालांकि विद्यार्थियों की उपस्थिति 80 फीसदी तक पहुंच गई है। नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से कक्षा दो तक के बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर बाद कुछ खाने की जरूरत होती है। यह बच्चे स्कूल आने का रुझान भले ही दिखा रहे हैं, लेकिन एकाग्रता की कमी सामने आ रही है।