लूट के बाद पैर छूकर माफी मांगता पुलिसवाला।
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अफसरों ने करतूत पर पर्दा न डाला होता तो दिल्ली के कारोबारी से एक लाख रुपये लूटने वाले सिपाही पहले ही सलाखों में पहुंच गए होते। आचार संहिता की आड़ में दिल्ली के व्यापारी से एक लाख रुपये लूटने वाले दोनों सिपाहियों ने नोटबंदी के बहाने भी जमकर लूटपाट की थी।
गांधीनगर के व्यापारी से सिपाहियों ने साढ़े चार लाख रुपये और लाइनपार के व्यापारी से ढाई लाख रुपये लूट लिए थे। दिल्ली के कारोबारी विवेक शर्मा से एक लाख रुपये लूटने के मामले में गिरफ्तार हुए कोतवाली के सिपाही मोतीराम और जयप्रकाश के कारनामे एक - एक कर सामने आने लगे हैं।
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आचार संहिता के नाम पर व्यापारी को लूटने वाले सिपाहियों ने नोटबंदी के नाम पर भी कई लोगों की रकम छीनी थी। आठ नवंबर को लागू हुई नोटबंदी के चार दिन बाद ही इन सिपाहियों ने अपने अन्य साथियों की मदद से गलशहीद और कोतवाली के बॉर्डर पर गांधी नगर के एक व्यापारी को रोक लिया था।
व्यापारी के पास करीब साढ़े चार लाख रुपये के पुराने नोट थे। व्यापारी अपनी रकम एक्सचेंज करने जा रहा थे। व्यापारी ने लाख तर्क दिए लेकिन सिपाहियों ने एक नहीं मानी और जेल भेजने की धमकी देकर 4.5 लाख रुपये छीनकर भगा दिया। इसी तरह इंपीरियल तिराहे पर भी कालेधन के शक में पुलिस ने लाइनपार के दवा व्यापारी को पकड़ लिया था।
उसके पास ढाई लाख रुपये थे। पुलिस ने व्यापारी से रकम छीनी और भगा दिया। दोनों मामलों की शिकायतें पीड़ितों ने पुलिस से की थी, लेकिन एक्शन नहीं हुआ। पब्लिक से लूटपाट कर रहे पुलिस के इस गैंग में कुछ सब इंस्पेक्टर भी बताए जा रहे हैं। हालांकि सीओ की फटकार के बाद कोतवाली पुलिस ने हांकि सीओ ने मामले को रफादफा करते हुए व्यापारी की रकम वापस करा दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।