चंडीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में गुरुवार को सफर कर रही महिला की अचानक से तबियत खराब हो गई। उसकी डिलीवरी होने सूचना टीटीई ने कंट्रोल रूम को दी। रेलवे की एंबुलेंस तो पहुंची, लेकिन उसमें डाक्टर नहीं थे। अस्पताल से पूरी जानकारी होने के बावजूद एक नर्स और कंपाउंडर को भेज दिया गया।
वहीं स्टेशन पर उतार गई महिला की डिलीवरी स्टेशन पर ही होने लगी तो हड़कंप मच गया। आनन फानन में102 नंबर सेवा पर फोन करके महिला अस्पताल से एंबुलेंस बुलाई और महिला को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रेलवे यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के दावे कर रहा है। एक ट्विटर पर बच्चों को डायपर और दूध तो मिल रहा है, लेकिन जान खतरे में पड़ जाए तो डाक्टर की उम्मीद नहीं की जा सकती। गुरुवार को चंडीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में संजय अपनी पत्नी ललिता के साथ सफर करा रहा था।
ललिता को तेज दर्द होने के पर उसने टीटीई को सूचना दी। टीटीई ने कंट्रोल रूम को जानकारी देकर डाक्टर स्टेशन पर भेजने के निर्देश दिए। ट्रेन आने से पहले ही एंबुलेंस स्टेशन पर पहुंच गई, लेकिन उसमें डाक्टर नहीं आया। सुबह छह बजे ट्रेन मुरादाबाद स्टेशन पहुंची तो महिला को गंभीर हालत में ट्रेन से उतारा गया।
लेकिन डाक्टर नहीं होने के कारण नर्स और कंपाउंडर भी उसकी मदद नहीं कर पाए। वहीं स्टेशन मास्टर ने डाक्टर नहीं होने के कारण 102 पर फोन करके महिला एंबुलेंस को बुलाया। थोड़ी देर बाद महिला की डिलीवरी स्टेशन पर ही शुरू हो गई।
20 मिनट बाद एंबुलेंस आई और महिला को जिला महिला अस्पताल ले जाया गया। वहीं महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। दो घंटे बाद ही परिवार एंबुलेंस बुक कराकर वहां से रवाना हो गया।