अब क्या होगा ट्रस्ट का अगला रुख
जौहर ट्रस्ट की ओर से इस आदेश को कमिश्नर, राजस्व परिषद या फिर हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ट्रस्ट के अधिवक्ता रमेश पाठक का कहना है कि अभी हमें आदेश की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है। प्रमाणित प्रति मिलने के बाद उसे इलाहाबाद में अधिवक्ताओं के पास भेज दिया जाएगा। वो लोग ही फैसला करेंगे कि इस आदेश को कहां चुनौती देनी है।
जौहर यूनिवर्सिटी व विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर: डीएम
जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह का कहना है कि इस फैसले से जौहर यूनिवर्सिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामला केवल जमीन के मालिकाना हक का है। जमीन केवल जौहर ट्रस्ट से राज्य सरकार के नाम पर चली जाएगी।
यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर यूनिवर्सिटी के संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई निर्देश जारी किया जाता है तो यह अलग बात है। इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है।