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शिक्षा को संस्कृति से जोड़कर चरित्रवान युवा तैयार कर रहा आर्य समाज

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मुरादाबाद। शिक्षा को संस्कृति से जोड़कर आर्य समाज भारत में युवाओं को चरित्रवान बना रहा है। यह शब्द आर्यवीर महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि यती नरसिंहानंद गिरी ने कहे। तीसरे दिन आर्यवीरों की शाखा का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के सभी गुरुकुलों की छात्राओं और छात्रों ने शस्त्र-शास्त्र कौशल का प्रदर्शन किया।
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आचार्य डॉ. सुनील झा, आर्य कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की संचालिका सुमेधा ने अपनी शिष्याओं के साथ वेद मंत्रों का उच्चारण कर वृहद यज्ञ कराया। मुख्य अतिथि ने कहा कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं, मूर्ति पूजा करता हूं। इसके बावजूद हर मंच से महर्षि दयानंद सरस्वती और उनके ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश को पढ़ने के लिए की हर मूर्ति पूजक से आह्वान करता हूं। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद इस देश की आजादी के अग्रदूत रहे हैं। जो धर्म को जानता है वह आर्य है। महर्षि ने हमें बलि चढ़ाए जाने वाले भेड़-बकरी नहीं बल्कि सिंह बनने की प्रेरणा दी है। शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना ही महर्षि के विचारों पर चलना है। कार्यक्रम में प्रणव शास्त्री, प्रीति, काव्य सौरभ, तृप्ति जैमिनी, शैलेंद्र गुप्ता, नीलम गुप्ता, सजल, वैशाली, धवल दिक्षित, गुरविंदर सिंह, डॉ. अनुज अग्रवाल आदि अतिथि मौजूद रहे।
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