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ट्रेजरी में सात करोड़ का गबन करने वाले आरोपी गैंगस्टर में गिरफ्तार

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मुरादाबाद। मुरादाबाद के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने गैंगस्टर में कार्रवाई की है। इस मामले में शनिवार को पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि नौ आरोपी अभी फरार हैं।
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सहायक पुलिस अधीक्षक अनिल यादव ने बताया कि करीब तीन साल पहले कोषागार विभाग में सात करोड़ रुपये का गबन किया था। विभाग के कर्मचारियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया था। जिसमें आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए थे। अब इस मामले में तेरह लोगों के खिलाफ गैंगस्टर में कार्रवाई की गई है।
आरोपी अनिल कुमार महरोत्रा ने सेवानिवृत्त होने के बाद लेखपालों के एरियर बिल की कूटरचित एवं फर्जी बिल बनाकर अपने गिरोह के सदस्यों के माध्यम से सरकारी धन का गबन कर लिया गया।
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एएसपी ने बताया कि आरोपी अनिल कुमार महरोत्रा निवासी साईं मंदिर के सामने मिलन विहार थाना मझोला, महेंद्र सिंह निवासी बहादुरपुर थाना बिलारी, प्रवीन सिंह निवासी बहादुरपुर थाना बिलारी और हरीश गिरी निवासी मौ. ऋषिपुरम निकट शान्तिपुरम सिद्धार्थनगर कस्बा और थाना बिलारी जनपद मुरादाबाद को गिरफ्तार किया गया। शनिवार दोपहर बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
नौ आरोपी अभी फरार
मुरादाबाद। थाना प्रभारी सिविल लाइंस सहंसवीर सिंह ने बताया कि गैंगस्टर के इस मामले में आरोपी अरुण कुमार भटनागर निवासी मो. अब्दुल्ला उत्तरी थाना बिलारी, हिमाशु सक्सेना निवासी सिहाली माला थाना बिलारी, सुधीर कुमार निवासी मो. अब्दुल्ला उत्तरी थाना बिलारी, लईक लेखपाल तहसील सदर मुरादाबाद, तनवीर इकबाल निवासी मो. अब्दुल्ला थाना बिलारी, कांती देवी पत्नी महेशस्वरुप भटनागर निवासी मौ. अब्दुल्ला उत्तरी थाना बिलारी, ज्योति भटनागर निवासी बरवालान थाना मुगलपुरा, शकुंतला भटनागर, बरवालान थाना मुगलपुरा, शशि यादव रामनगर गगपुर थाना बिलारी फरार हैं। जिनकी तलाश में पुलिस टीम जुटी है।
यह था मामला
मुरादाबाद। कलक्ट्रेट के भूलेख विभाग में करीब 14 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। लेखपाल यहां फर्जी बिल जारी कर देते और दूसरे लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद कोषागार विभाग में भी मार्च 2018 में घोटाला पकड़ा गया था। तत्कालीन एडीएम प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह को लेखपाल को जारी किए गए एरियर भुगतान के प्रपत्र में कुछ संदेह हुआ था। उन्होंने इस मामले की जांच कराई थी। गोपनीय जांच में पूरा मामला पकड़ में आने के बाद भूलेख विभाग के सेवानिवृत्त बाबू अनिल मेहरोत्रा और लेखपाल अरुण भटनागर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आरोपियों ने अपने रिश्तेदार और परिवार के लोगों के खातों में भी रकम ट्रांसफर की थी।
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