सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ छजलैट थाने में 2008 में केस दर्ज किया गया था। दो जनवरी 2008 को आजम खां अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर मे एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। छजलैट के सामने आजम खां के वाहन को चेकिंग के लिए रोका गया था। इसी बात को लेकर विवाद हो गया था। जिसे लेकर जमकर बवाल हुआ था। इस मामले में पिता-पुत्र समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। 13 फरवरी 2023 में एमपी-एमएलए स्पेशल मजिस्ट्रेट ट्रायल की कोर्ट ने पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की कैद के साथ दोनों पर तीन-तीन हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद दोनों को 25-25 हजार रुपये के जमानती दाखिल कर जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
आजम खां और अब्दुल्ला आजम के वकील ने इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट/एडीजे पांच अचल लवानिया की कोर्ट में हुई। आजम के वकील ने कहा कि घटना के वक्त अब्दुल्ला आजम नाबालिग थे। इस कारण से उनके मुकदमे की सुनवाई किशोर न्यायालय में की जानी चाहिए थी। अभियोजक पक्ष ने अपील का विरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने पिता-पुत्र की अपील को खारिज करते हुए दोनों की सजा बरकरार रखने के आदेश पारित किए है।