अभिभावकों का निजी स्कूलों पर आरोप है कि वह उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम 2018 का उल्लंघन कर रहे हैं। तय दुकानों पर ही किताबें मिलने के अलावा मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी की जा रही है। एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई करवाई जा रही है।
अभिभावकों ने शहर के 26 निजी स्कूलों की सूची डीआईओएस को सौंपी, जिनकी किताबें सात दुकानदारों पर मिलती हैं।
इनमें से एक दुकानदार पर 13 स्कूलों की किताबें मिल रही हैं। सिर्फ दो ही ऐसे दुकानदार हैं, जिन पर एक-एक स्कूल की किताबें मिल रही हैं। इस दौरान राजदीप गोयल, वैभव गुप्ता, राजीव सिंह, नीति शर्मा, मनु मेहरोत्रा, सुशील कुमार, उमेश कुमार शर्मा, अतुल गुप्ता, मतीन उद्दीन, मुबाशिर उद्दीन, मनीष बेरी, निखत, निज़ाम बैग, कौशल सक्सेना मौजूद रहे।
- अधिकांश स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई गई हैं। कुछ स्कूलों ने कक्षा नौ से 12 में एनसीईआरटी की किताबें लगाईं भी हैं तो उनके साथ निजी प्रकाशकों की भी पुस्तकें भी हैं। स्कूलों में केवल निजी प्रकाशकों की किताबें से पढ़ाई करवाई जा रही है। - अंकित अग्रवाल, अभिभावक
- किसी भी स्कूल द्वारा सीधे किसी दुकानदार का नाम नहीं बोला जा रहा है, लेकिन जो किताबों की सूची स्कूल द्वारा दी जा रही है, वह किताबें उन्हीं के तय किए दुकानदार पर मिलती हैं। दुकानदार और स्कूल की मिलीभगत से ही यह तय किया जाता है कि किस लेखक और प्रकाशक की किताब लगानी है। यह कृत्य उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम 2018 के विपरीत है। -कविता सचदेवा, अभिभावक
- तीन अप्रैल की शुल्क नियामक समिति की बैठक के बाद से कुछ स्कूलों में छात्रों से एनसीईआरटी की किताबें लेकर आने को कहा है। नहीं मिलने पर स्कूल किताब उपलब्ध करवाने के लिए भी कह रहे हैं। ऐसे में जिन अभिभावकों ने किताबें खरीद ली है, अब उनको वापसी करवाने की एक आसान प्रकिया करवाई जाए, ताकि अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम हो सके।
- कुमार रॉबिन, अभिभावक
- 2021 से लेकर 2025 तक मुरादाबाद के समस्त स्कूलों द्वारा लगभग 45 फीसदी तक की फीस बढ़ोतरी की चुकी है। हमारी मांग है कि सभी स्कूलों के विशेष ऑडिट कराया जाए, जिससे यह पता चल सके कि स्कूलों द्वारा जिस अनुपात में फीस बढ़ोतरी की गई है, क्या उसी अनुपात में शिक्षकाें का वेतन व अन्य खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है या नहीं। उन सभी निजी स्कूलों में जांच करवा करवाई जाए, जहां निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई करवाई जा रही है।
- अनुज गुप्ता, अध्यक्ष, मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल