कार्यकर्म में आने से पहले उन्होंने बातचीत में कहा था कि वह चाहते हैं, 'सरकार भद्दे-अश्लील गानों पर सेंसर के माध्यम से रोक लगाए। उनका मानना है कि सरकार मौजूदा समय में युवाओं को पथभ्रष्ट करने, नशे और ड्रग्स को प्रमोट करने वाले गायकों पर रोक लगाए। यूथ को संगीत परोसने के नाम पर यूथ को बर्बाद करने वाले अपराधी हैं।'
चल छैंया-छैंया, चक दे इंडिया, रमता जोगी, जय हो, हौले-हौले से हवा चलती है, जैसे गानों से धमाल मचाने वाले गायक सुखविंदर सिंह अपने मुरादाबाद आगमन पर काफी उत्साहित हैं। कहते हैं कि वह कभी ऐसा गाना नहीं गा सकते, जिसमें अपशब्द हों। गुलजार, जावेद अख्तर, इरशाद कामिल, आनंद बक्शी, समीर जैसे गीतकार उनके दिल के करीब हैं।
वह इनके लिखे गीत गाना इसलिए पसंद करते हैं कि उनके गीतों के शब्द तो अच्छे हैं ही साथ ही वे सांस्कृतिक रूप से समृद्घ भी हैं। उनमें मनोरंजन भी बहुत है। गुलजार के बारे में वह कहते हैं कि एक बार उन्होंने ऐसी बात कही जिससे उनका दिल बाग-बाग हो गया। उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि मैं उनके एक हजार गाने गाऊं। कौन सा गाना उनके दिल के करीब है, यह पूछने पर सुखविंदर ने कहा कि सभी गाने वे दिल लगाकर गाते हैं। एक का नाम लेना मुश्किल है।
शास्त्रीय राग-रागिनियों में छेड़छाड़ के सुखविंदर खिलाफ हैं। रागों का मूल स्वरूप बना रहना चाहिए। कहते हैं कि भारतीय शास्त्रीय गायक बेहद प्रतिभाशाली हैं। वेस्ट में जिस भव्य तरीके से सिंफनी पेश की जाती है, लगता है कि यूनिवर्स जमीं पे उतर आया है। उसी भव्यता से भारतीय शास्त्रीय संगीत पेश किया जाना चाहिए। वह बताते हैं कि भारतीय फिल्मों का संगीत अब हालीवुड फिल्मों में भी इस्तेमाल हो रहा है। संयोग से आठ फिल्मों में भारतीय गाने इस्तेमाल हुए हैं इनमें से छह मैंने गाए हैं।
अच्छे गाने हर कोई सुनना चाहता है। वह बताते हैं कि हाल के उनके अमेरिका टूर में तीस फीसदी श्रोता अमेरिकन थे लेकिन जय हो जैसे गीतों को उन्होंने खूब इन्ज्वाय किया। हिंदी को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए हिंदी पर छिड़े हालिया विवाद और गुरुदास मान के बयान पर सुखविंदर कहते हैं कि मां बोली का अपमान नहीं करना चाहिए लेकिन एक भाषा तो देश की जरूरत है इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
मिक्का सिंह के पाकिस्तान में जाकर गाने पर छिड़े विवाद और पैसे के लिए क्या वह पाकिस्तान में जाकर गाना पसंद करेंगे, के सवाल पर सुखविंदर बोले कि पाकिस्तान से पैसे, सम्मान के बड़े-बड़े आफर मिलते हैं लेकिन तिरंगे कफन में लिपटी शहीदों की लाशें मेरे सामने आ जाती हैं। मेरे कमरे में संतों और भगवान की फोटो है तो शहीदों की भी। वैसे मेरा निजी तौर पर पाकिस्तानी कलाकारों से विरोध नहीं है।
अमिताभ बच्चन तो मेरे लिए भारत रत्न
अमिताभ बच्चन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने पर सुखविंदर कहते हैं वह इसके लिए सबसे उपयुक्त पात्र हैं। मेरी नजर में तो वह भारत रत्न हैं। अमिताभ बच्चन से टाइम की पाबंदी, नई चीजों को सीखने की ललक और खुद को नए जमाने के हिसाब से बदलने के लिए तैयार होना सीखा जा सकता है।
मूंगफली खाऊंगा, छिलके ले जाऊंगा
अमर उजाला के कार्यक्रम में मुरादाबाद आने के प्रति सुखविंदर बेहद उत्साहित हैं। वह कहते हैं कि मैं चाहता हूं कि मुरादाबाद में धमाल मच जाए। दिल्ली से आते वक्त रास्ते में मूंगफली और गजक खाऊंगा। हंसते हुए कहते हैं कि लेकिन छिलके मैं सड़क पर नहीं फेकूंगा, उसे थैले में भरकर ले जाऊंगा।