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Moradabad News: निर्यात के साथ नए कारोबार में भी आजमा रहे हाथ

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मुरादाबाद। निर्यात में सालभर से चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच निर्यातक अब दूसरे कारोबार में भी हाथ आजमाने लगे हैं। शहर के बीस फीसदी निर्यातक प्रापर्टी, होटल, रेस्टोरेंट समेत अन्य कारोबार में उतर चुके हैं। वहीं दूसरे निर्यातक भी उनके नक्शेकदम पर चलने की तैयारी में हैं।
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पीतलनगरी हस्तशिल्प उद्योग के लिए देश-दुनिया में मशहूर है। इस कारोबार से शहर के छोटे-बड़े करीब 2400 निर्यातक जुड़े हैं, जो मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को विदेश में अलग पहचान दिलाते हैं। जिले से हर साल औसतन 8000 से 9000 से करोड़ रुपये का निर्यात होता है। इसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी अमेरिका की है, लेकिन पिछले एक साल से निर्यात में उतार-चढ़ाव चल रहा है। कभी रुस-यूक्रेन युद्ध कारोबार के आड़े आया तो कभी इस्राइल-हमास युद्ध रुकावट बना।
अमेरिका की आर्थिक मंदी ने भी निर्यात को प्रभावित किया है। यही वजह है कि पांच महीने में निर्यात में करीब चालीस फीसदी की गिरावट आई है। इस गिरावट ने निर्यातकोंं को कारोबार के दूसरे क्षेत्रों में उतरने की राह दिखाई है। हस्तशिल्प उद्योग के साथ-साथ निर्यातकों ने होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट, स्कूल कॉलेज, हॉस्पिटल से जुड़े कारोबार में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। निर्यातकों ने ये कारोबार मुरादाबाद के अलावा दूसरे प्रदेशोंं में भी शुरू किया है।
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निवेश के लिए उत्तराखंड-नोएडा निर्यातकों की पहली पसंद

दूसरे कारोबार में निवेश के लिए मुरादाबाद के निर्यातकों की पहली पसंद उत्तराखंड और नोएडा है। निर्यातकों ने देहरादून, नैनीताल, हल्द्वानी में स्कूल और रेस्टोरेंट खोल रखे हैं। इसके अलावा नोएडा में जेवर के आसपास के इलाकों में प्रापर्टी का कारोबार कर रहे हैं। कुछ निर्यातक विदेश में भी निवेश करने लगे हैं।

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- पिछले कुछ समय से निर्यात में गिरावट आई है। इसके कई कारण है। आगे की स्थिति भी अभी पूरी तरह से साफ नहीं है। इसके कारण निर्यातक दूसरे कारोबार में उतरने लगे हैं। जिससे निर्यात के उतार-चढ़ाव का कारोबार पर ज्यादा असर न पड़े। - अवधेश अग्रवाल, महासचिव, मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

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- निर्यात में उतार-चढ़ाव को देखते हुए कई निर्यातकों ने दूसरे कारोबार भी शुरू कर दिए हैं। शहर के निर्यातक होटल, रेस्टोरेंट, स्टोर, रिसॉर्ट, स्कूल कॉलेज खोलने के अलावा बड़े स्तर पर प्रापर्टी का काम करने लगे हैं। - विशाल अग्रवाल, नेशनल चेयरमैन, यस
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निर्यात में गिरावट के कारण

- रूस-यूक्रेन युद्ध

- इस्रराइल-हमास युद्ध

- अमेरिका में आर्थिक मंदी

- कंटेनरों के रेट में तीन गुना वृद्धि

- स्थानीय स्तर पर कच्चे माल में 15 फीसदी की वृद्धि

- चीन के बंद बाजार का खुलना
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