विधानसभा चुनाव से पहले सपा के संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है। संगठनात्मक गुटबाजी के खिलाफ अखिलेश यादव सख्त हैं। लखनऊ में चार दिन पहले कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
सपा में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी गुटबाजी के खिलाफ अखिलेश सख्त हैं। चार दिन पहले उन्होंने लखनऊ में मुरादाबाद के नेताओं के साथ बैठक में पूरे प्रकरण की समीक्षा की थी। गुटबाजी पर साफ कहा था कि इस मामले की जांच कराएंगे और कार्रवाई भी करेंगे।
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वहीं मंगलवार को कमाल अख्तर को सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद सियासी चर्चाओं ने नया रूप ले लिया है। माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव से पहले संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है।
2024 के चुनाव के बाद से मुरादाबाद में सपा की अंदरूनी गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है। इसके बाद से ही सपा कई खेमों में बंट गई। इसका उदाहरण है कि सांसद की अध्यक्षता में आयोजित दिशा की बैठक में ही सपा के विधायक नहीं पहुंचते।
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आरोप हैं कि सांसद अपनी ही पार्टी के विधायकों को तवज्जो नहीं देतीं, तो सांसद का कहना है कि उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों की जानकारी या निमंत्रण नहीं दिया जाता। आए दिन सोशल मीडिया पर अलग-अलग गुटों के कार्यकर्ता अपने नेताओं के समर्थन में और दूसरे के विपक्ष में पोस्ट कर रहे हैं। ऐसे में पिछले महीने देहात विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के पीडीए सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा को न बुलाए जाने और उनका पोस्टर न लगाए जाने के मामले ने आग में घी का काम किया।
चार दिन पहले लखनऊ में हुआ बैठक में भी सांसद और कांठ विधायक के बीच की बेरुखी दिखाई दी। सांसद ने जहां कार्यक्रम में न बुलाने और उनका पोस्टर न लगाने को लेकर गुटबाजी के खिलाफ अपनी बात रखी। वहीं कांठ विधायक कमाल अख्तर ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह केवल आमंत्रित होने पर कार्यक्रम में पहुंचे थे।
आयोजन और पोस्टर तैयार कराने से उनका कोई संबंध नहीं था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि सांसद बनने के बाद रुचि वीरा ने भी अपने पोस्टरों और होर्डिंग्स में किसी विधायक या वरिष्ठ नेता को जगह नहीं दी, इसलिए उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं।
हालांकि मंगलवार को अख्तर से मुख्य सचेतक का पद हटाए जाने के बाद पार्टी ने इसके पीछे के कारणों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। कमाल अख्तर का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेश का हमेशा पालन किया है। वहीं रुचि वीरा का कहना है कि इस निर्णय का किसी मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने लखनऊ में बस अपनी बात रखी थी, बाकी कौन किस भूमिका में कार्य करेगा यह शीर्ष नेतृत्व तय करता है। वहीं लखनऊ में राज्य सभा सांसद जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी और जिलाध्यक्ष जयवीर यादव को भी अखिलेश ने सख्त हिदायत दी थी कि संगठन का जोर चुनाव की तैयारियों पर रहे। अब गुटबाजी की शिकायत नहीं आनी चाहिए। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव से पहले सपा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हो सकता है।