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अदालत के आदेश पर भारी पड़ा इंस्पेक्टर का रसूख

Tue, 19 Jan 2016 12:22 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
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एक पुलिस इंस्पेक्टर की हिमायत में मझोला पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को भी ताक पर रख छोड़ा है। अदालत ने इंस्पेक्टर के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस ने आठ दिन बीतने के बाद भी केस दर्ज नहीं किया है।
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बरेली विजिलेंस में तैनात इंस्पेक्टर भरत सिंह पर उनकी पुत्रवधु ने रेप के आरोप लगाते हुए अदालत में याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई के बाद सीजेएम ने पुलिस को इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके तफ्तीश करने का आदेश दिया था। मझोला थाना क्षेत्र में कांशीराम नगर निवासी इंस्पेक्टर भरत सिंह बरेली विजिलेंस में तैनात हैं।



इंस्पेक्टर की पुत्रवधु ने 20 दिसंबर को इंस्पेक्टर पर रेप का आरोप लगाया था। इंस्पेक्टर की पुत्रवधु ने पुलिस में शिकायत की थी। लेकिन आरोप था कि पुलिस ने इंस्पेक्टर के रसूख के चलते मुकदमा दर्ज नहीं किया। पीड़िता का मेडिकल भी नहीं कराया। लिहाजा पीड़िता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भी याचिका दाखिल की थी।
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हालांकि इसके बाद छह जनवरी को इंस्पेक्टर ने दोनों पक्षों में समझौता होने का दावा किया था। लेकिन उस वक्त इंस्पेक्टर की पुत्रवधु ने इसे खारिज करते हुए आरोप लगाए थे कि इंस्पेक्टर ने उसे और उसके पिता को जान से मारने की धमकी देकर जबरन समझौते पर दस्तखत करा लिए हैं।


इसके बाद 11 जनवरी को अदालत ने मझोला पुलिस को आदेश दिया था कि वह आरोपी इंस्पेक्टर भरत सिंह के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करके विवेचना करे। लेकिन आदेश थाने पहुंचने के बावजूद पुलिस ने इंस्पेक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया है। इंस्पेक्टर मझोला राजेश द्विवेदी का तर्क है कि इंस्पेक्टर की पुत्रवधु और इंस्पेक्टर के बीच समझौता हो गया है। जिसके बाद इंस्पेक्टर की बहू ने शपथ पत्र दे दिया है कि वह मामले में अब कोई कार्रवाई नहीं चाहती है।
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