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Moradabad News: 10 साल बाद ईपीसीएच ने वार्षिक सदस्यता शुल्क 5000 से बढ़ाकर किया 8000

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मुरादाबाद। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने 10 साल के अंतराल के बाद अपनी वार्षिक सदस्यता ग्रहण या नवीनीकरण शुल्क में वृद्धि की है। वार्षिक शुल्क को 5000 से बढ़कर 8000 रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ा हुआ शुल्क तीन महीने बाद से प्रभावी होगा। इसके पहले निर्यातक पुराना शुल्क जमाकर ईपीसीएच की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।
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ईपीसीएच में पूरे देश से 10 हजार से अधिक निर्यातक जुड़े हुए हैं। इसमें मुरादाबाद जिले के करीब दो हजार निर्यातकों शामिल हैं। ईपीसीएच की सदस्यता नवीनीकरण के लिए हर साल वार्षिक शुल्क जमा करना पड़ता है। ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया कि कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन बोर्ड की ओर से एक साल पहले वार्षिक सदस्यता शुल्क पांच हजार से बढ़ाकर आठ हजार रुपये कर दिया गया था। इसलिए इसे हर हाल में लागू किया जाना था। इसलिए अब इसे लागू किया गया है। यह शुल्क एक जुलाई से प्रभावी होगा। अगर देखा जाए तो सदस्यता ग्रहण करने वाले हर एक निर्यातक पर 250 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से नवीनीकरण शुल्क पड़ेगा। यह निर्यातकों के लिए कोई बड़ी रकम नहीं है।
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से निर्यातक अस्थाई वित्तीय या परिचालन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसलिए नया वार्षिक सदस्यता शुल्क लागू करने की तिथि तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है।
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ईपीसीएच के द्वारा निर्यातकों को दी जाती हैं सुविधाएं
-ईपीसीएच की सदस्यता ग्रहण करने वाले निर्यातकों के लिए कई सुविधाएं दी जाती है। ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने बताया कि निर्यातकों को विदेशी खरीदारों को लेकर किसी प्रकार की समस्या न हो। इसके लिए विदेशी खरीदारों को एक मंच पर बुलाया जाता है। इसलिए निर्यातकों को विदेशी खरीदार आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। निर्यातकों के लिए टेस्टिंग लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। सरकार की योजनाओं का लाभ दिलवाया जाता है। वहीं ईपीसीएच विभिन्न जगहों पर मेले लगाकर निर्यातकों कोे निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराता है।
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