मुरादाबाद। केजीके कॉलेज में बड़ा उलटफेर हुआ है। प्रबंधक ने आयोग से चयनित प्राचार्य से प्रशासनिक और वित्तीय फैसले वापस लेकर दो अन्य प्रोफेसरों को जिम्मेदारी सौंप दी है। प्रबंधक का आरोप है कि प्राचार्य द्वारा समय पर सही फैसले नहीं लिए जाने की वजह से कॉलेज का भवन जर्जर हुआ। अब मरम्मत के बजाय पुनर्निमाण में अधिक बजट खर्च करना पड़ेगा। साथ ही उन पर साथी शिक्षकों के साथ पक्षपात का भी आरोप है।
प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार महाविद्यालय के बुनियादी ढांचे की बिगड़ती स्थिति और समग्र प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताई है। मौजूदा भवन की आवश्यक मरम्मत और रखरखाव का कार्य समय पर नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप, भवन की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कुछ मामलों में यह मरम्मत से परे हो गया है, जिससे संस्थान को बार-बार और अनावश्यक नुकसान हो रहा है। पिछले 25 वर्षों से प्रबंधन द्वारा प्रधानाचार्य कार्यालय को निरंतर समर्थन देने के बावजूद, यह खेदजनक है कि प्राचार्य का प्रदर्शन अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं रहा है। भवन की मरम्मत, पुस्तकालय सुधार और अन्य आवश्यक संस्थागत गतिविधियों जैसे विकासात्मक कार्यों को सुगम बनाने के बजाय, बार-बार बाधाएं डाली गई हैं और अनावश्यक पत्राचार किया गया है, जिससे प्रगति बाधित हुई है। इससे छात्रों, कर्मचारियों और महाविद्यालय से जुड़े सभी लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
पुस्तकालय और तीन कमरे हुए जर्जर
प्रबंधक का कहना है कि भवन की नियमित मरम्मत करवानी थी। उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसकी वजह से पुस्तकालय और कमरा संख्या 11, 12 और 13 जर्जर हो गए। इसकी वजह से उसे तोड़कर नया बनाना पड़ रहा है। इससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ रहा है।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी से नहीं की मुलाकात
प्रबंधक का कहना है कि निर्माण या मरम्मत कार्य में बजट को लेकर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा एक हजार रुपये से अधिक खर्च पर अनुमति लेना आवश्यक करने की बाध्यता बताई गई। इसके लिए सिर्फ पत्राचार किए गए, लेकिन कभी भी कॉलेज या छात्रहित में मरम्मत को आवश्यक बताने के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी से मुलाकात कर अनुरोध नहीं किया गया।
वरिष्ठता के प्रोटोकॉल का पालन न करने का आरोप
प्रबंधक के अनुसार प्राचार्य ने अपनी अनुपस्थिति के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठता के उचित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिससे वरिष्ठ संकाय सदस्यों में असंतोष उत्पन्न हुआ है। शिक्षण स्टाफ के प्रति सम्मानजनक और समावेशी व्यवहार की कमी के संबंध में भी कई शिकायतें मिली हैं, जो एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण में अस्वीकार्य है जिसे एक एकजुट और सम्मानजनक संस्थान के रूप में कार्य करना चाहिए।
बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू करने के आदेश
प्रबंधक विवेक खन्ना ने पत्र जारी कर कहा कि प्रशासनिक फैसले लेने के अधिकार प्रोफेसर विनोद पांडे को प्रदान किए हैं। वित्तीय फैसले लेने के अधिकार प्रोफेसर विनोद पांडे और प्रोफेसर उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से सौंपे गए हैं। प्राचार्य (प्रो. सुनील चौधरी) जिस भी समिति में हैं, उसकी शक्तियां प्रोफेसर विनोद पांडे को सौंप दें। यह हस्तांतरण तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
प्राचार्य को हटाया नहीं गया है। संस्थान के सफल संचालन के लिए तत्काल प्रशासनिक व वित्तीय फैसले लिए जा सकें, इसलिए दो प्रोफेसरों को इनके सहयोग के लिए लगाया गया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज
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ऐसा कोई नियम नहीं है, जहां कार्यरत प्राचार्य के अधिकार किसी और को दे दिए जाएं। यह पूर्णरूप से विधि विरुद्ध है। इसके खिलाफ हमें उचित मंच पर अपील करनी होगी तो करेंगे। मैं वर्ष 2021 में प्राचार्य बना हूं। वर्ष 2024 में बिल्डिंग बनाने के लिए प्रबंधक द्वारा पहली बार अनुमति दी गई। प्रबंधक की अनुमति से समय से टेंडर किया गया, लेकिन उनके द्वारा कार्य अनुमति नहीं दी गई। री टेंडर करने को कहा, वह भी कर दिया। हमने उनकी सभी बात मानी हैं। प्राचार्य के अधिकार किसी को नहीं दिए जा सकते।
प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य, केजीके कॉलेज