मुरादाबाद। बाढ़ के दबाव के कारण मूंढापांडे क्षेत्र के बीकनपुर पुल का संपर्क मार्ग टूट गया। स्थानीय लोगों ने चंदा लगाकर पुल से लकड़ी का संपर्क मार्ग बनाया लेकिन प्रशासन ने उस पर चलने से रोक लगा दी। तीन माह गुजरने के बाद प्रशासन ने संपर्क मार्ग बनाने की पहल नहीं की।
ग्राम नाजरपुर से ग्राम गोविंदपुर के संपर्क मार्ग पर ग्राम बीरपुर बरियार उर्फ खरग बीकनपुर के पास पुल बना है। 12 सितंबर को बाढ़ के कारण इस पुल का संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। स्थानीय लोगों ने अपने आवागमन के लिए एक अस्थायी मार्ग पुल भी बना लिया था। इसके बाद इस पुल से आवाजाही शुरू हो गई थी। लेकिन इसे असुरक्षित मानते हुए प्रशासन ने तीन महीने पहले पुल से आवागमन पर रोक लगा दी थी। प्रशासन का मानना था कि इस मार्ग से आवागमन के दौरान कभी भी दुर्घटना हो सकती है। लेकिन कुछ दिन बार फिर से इस पुल से लोगों ने आवागमन शुरू दिया। एडीएम वित्त एवं राजस्व सत्यम मिश्र ने बताया कि इस से गुजरने पर दोबारा से लोग लगा दी गई है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग एवं बाढ़ खंड विभाग को भी निर्देशित किया गया है। इस मामले में एसडीएम सदर को बताया गया है कि रामगंगा की सहायक नदी पर स्थिति अतिसंवेदनशील है। क्षतिग्रस्त एप्रोच मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर जन सामान्य की सुरक्षा के लिए 24 घंटे ड्यूटी लगाए। यहां हाई लाइटर या रिफ्लेक्टर लगाना जरूरी है। साथ ही स्थानीय स्तर पर ग्राम प्रधान व अन्य संभ्रांत व्यक्तियों के साथ एक बैठक कर ग्रामीणों को जागरूक करना होगा ताकि लोग वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें।
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वैकल्पिक मार्ग से जाने पर 30 किमी का लगाना पड़ता है चक्कर
जिला प्रशासन ने बाढ़ के दौरान भी बीकनपुर पुल से आवागमन पर रोक लगाई थी लेकिन स्थानीय लोगों की जरूरत भी अहम है। लोगों का कहना है कि चंदा लगाकर लकड़ी का 52 फीट रास्ता तैयार किया गया है। इस रास्ते पर बाइक और स्कूटी का आवागमन हो रहा है। वैकल्पिक मार्ग से जाने में 30 किमी का चक्कर काटना पड़ेगा। लोगों को पंडित नगला से होकर मुरादाबाद जाना पड़ेगा। गांव के नन्हे, चंद्र प्रकाश सहित अन्य लोगों का कहना है कि ग्रामीणों को चारा लेने और गेहूं की बुवाई करने खेत में जाना पड़ता है। जिला प्रशासन को ग्रामीणों की जरूरतों को समझना चाहिए।