सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमला करने के आरोपियों की पेशी शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच हुई। पुलवामा की घटना को देखते हुए आतंकियों की पेशी के दौरान सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सुरक्षा में अतिरिक्त पुलिस लगाई गई थी। पुलवामा की घटना को लेकर शोक में अधिवक्ता शुक्रवार को न्यायिक कार्य से विरत रहे। इस वजह से मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर 31 दिसंबर 2007 की आधी रात के बाद आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे और एक रिक्शा चालक भी मारा गया था। इसके बाद 10 फरवरी 2008 को एटीएस, एसटीएफ और सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस ने रोडवेज बस अड्डे से पांच आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उसी दिन लखनऊ में भी तीन आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी। आतंकियों को कड़ी सुरक्षा के बीच बरेली और लखनऊ की जेल में रखा गया है।
शुक्रवार को आरोपियों को बरेली और लखनऊ की जेल से यहां लाया गया था, लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत होने की वजह से इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले में अगली सुनवाई अब 27 फरवरी को होगी।