मुरादाबाद। करीब 22 साल बाद फरवरी के महीने में मुकद्दस रमजान की आमद हुई। खुदा की रजा के लिए रोजेदारों ने बृहस्पतिवार को पहला रोजा रखा है। 12 घंटे 46 मिनट भूखे प्यासे रहकर छोटे-बड़े सभी ने रोजा रखकर खुदा की इबादत की। शहर की मस्जिदें हर नमाज में रोजेदारों से भरी रहीं।
बृहस्पतिवार को सहरी के बाद मुस्लिम इलाकों की रौनक देखने लायक थी। मुगलपुरा, गलशहीद, रहमतनगर, चक्कर की मिलक, करूला, जिगर कॉलोनी, हरथला आदि मुस्लिम इलाकों में रमजान की राैनक रही। सुबह फज्र की नमाज में मस्जिदों में रोजेदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। नमाज के बाद इन इलाकों में चहलपहल बढ़ गई। रमजान का पहला रोजा होने से युवा और बच्चे उत्साहित दिखे। जोहर की नमाज के दौरान शायद ही ऐसी कोई मस्जिद थी, जो रोजेदरों से भरी नहीं थी। ऐसे ही अस्र और मगरिब की नमाज में भी लोगों की भारी भीड़ रही। वहीं नमाज-ए-तरावीह में भी रोजेदारों की खासी भीड़ रही।
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रोजा खोलने के साथ खुदा का शुक्र अदा किया
मुरादाबाद। पहले रोजे की सहरी का समय सुबह 5 बजकर 25 मिनट था। इससे पहले ही रोजेदारों ने खाना पीना बंद कर दिया। इसके साथ ही रोजे की शुरुआत हो गई। मगरिब की अजान के पहले तक सभी तरह के चीजों पर खाने पीने की पाबंदी रही। करीब पाैने तेरह घंटे भूख और प्यास की शिद्दत को बर्दाश्त करने के बाद शाम 6 बजकर 11 मिनट पर मगरिब की अजान होने पर रोजेदारों ने रोजा खोला। बच्चे, युवा बुजुर्ग सभी ने साथ बैठ कर रोजा खोला और खुदा का शुक्र अदा किया।
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हर सुन्नत का रखा खास ख्याल
मुरादाबाद। रोजे के दौरान लोगों ने एक-एक सुन्नतों का ख्याल रखा। मुस्लिम इलाकों में अस्र की नमाज के बाद दातुन की बड़ी डिमांड रही। छोटे बड़ों ने दातुन कर सुन्नत अदा की। इसके साथ ही रोजा खोलने में भी सुन्नत का ख्याल रखा गया। रोजेदारों ने खजूर से रोजा खोलकर पैगंबर-ए-इस्लाम की सुन्नत अदा की।
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नमाज-ए-तरावीह में भरी रहीं मस्जिदें
मुरादाबाद। इफ्तार करने के बाद रोजेदार नमाज-ए-तरावीह में जुट गए। रात में ईशा की अजान होते ही मस्जिदों में रोजेदारों की चहलकदमी शुरू हो गई। अकीदतमंदों ने बड़े एहतिमाम के साथ कुरान सुना और बीस रकात नमाज अदा की। आखिर में अमन चैन की दुआ मांगी गई। साथ ही अल्लाह से रमजान के पूरे रोजे रखने की तौफीक भी मांगी गई।