अमरोहा। प्राचीन रियासत मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन कथावाचक नवीन प्रसाद नौटियाल शास्त्री ने भगवान के नाम और सत्संग की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य से जाने-अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं। ईश्वर के समक्ष उनका प्रायश्चित करना और अच्छे कर्म करना ही मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ईश्वर की आराधना के साथ जीवन में श्रेष्ठ कर्म करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सत्संग में व्यक्ति के जीवन को बदलने की शक्ति होती है। इसलिए मनुष्य को शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने के साथ ज्ञानी पुरुषों का सानिध्य प्राप्त करना चाहिए। क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा और संग्रह की भावना का त्याग कर विवेक के साथ कर्म करने की जरूरत है। उन्होंने कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार तथा रावण की तपस्या, ऐश्वर्य और अत्याचार समेत पृथ्वी और देवताओं की करुण पुकार के प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान भजन मंडली ने भजनों की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर डॉ. रमेश चंद्र गुप्ता एडवोकेट, अनिता बंसल, दीपक बंसल, सौरभ अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, ममता, रितु, बबीता, सुनीता, करुणेश गोयल, मीनू समेत श्रद्धालु मौजूद रहे।