मुरादाबाद। सुख हो अथवा दुख भगवान को पुकारो। कष्ट है तो सिर्फ भगवान को पुकारना चाहिए। गजेंद्र (हाथी) का पैर जब पानी में मगरमच्छ ने पकड़ा और गजेंद्र को अपने प्राण संकट में लगे तो उसने सगे संबंधियों को पुकारने की जगह भगवान को पुकारा। हस्तिनापुर दरबार में जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तो अपने पतियों, पितामह और गुरु की ओर देखने के बाद द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा तो वह द्वारिका से दौड़े आए और साड़ी के रूप में प्रकट हो गए। हमें हमेशा भगवान को ही पुकारना चाहिए।
इस्कान प्रचार समिति की ओर से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में साक्षी गोपाल दास ने समझाया कि सिर्फ भगवान ही कष्टों को दूर करने वाले हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। भक्त जब भाव से अथवा कुभाव से भगवान को पुकारता है तो भगवान गोलोक धाम से दौड़े चले आते हैं। हमारे ऊपर आने वाले कष्ट पूर्व जन्मों का फल है। जब व्यक्ति भगवान की भक्ति करता है तो पहाड़ के समान कष्ट भी मामूली हो जाते हैं। कष्ट होने पर कभी भगवान को दोष नहीं देना चाहिए। अपने पापों का फल हमें अवश्य भोगना पड़ता है। भागवत कथा के दौरान पादुका सेवा में राकेश टंडन, महाशक्ति उत्थान समिति द्वारा की जा रही है। व्यवस्था में महेश चंद्र अग्रवाल, नीमेश गुंबर, कृष्णलाल ढल, अशोक सिक्का, गोविंद गुप्ता, सतीश भंडूला, राजकुमार गुप्ता, अभय गुप्ता, दिनेश चंद्र, विश्वनाथ, हरिशंकर रस्तौगी, राकेश अरोरा, हरीश अरोरा आदि जुटे रहे।